राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद शर्मा ने बताया कि चौटाला गांव से राजस्थान की सीमा मात्र पांच किलोमीटर दूर है। चौटाला परिवार की राजस्थान के कई गांव व शहरों में पुरानी रिश्तेदारी है। चौटाला परिवार भी जाट समुदाय से आता है। राजस्थान में करीब 12 फीसदी जाट समुदाय के वोटर हैं, जो राज्य 40-45 सीटों पर अहम भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि उनके कम से कम पांच विधायक जीतकर आएं, ताकि राष्ट्रीय पार्टी की दिशा में आगे बढ़ सके। साथ ही सरकार बनाने में अहम रोल अदा करे।
किसको पहुंचाएंगे नुकसान
हरियाणा में भाजपा और जजपा साथ-साथ हैं। मगर राजस्थान में जजपा अभी तक अकेले लड़ने के मूड में है। राजस्थान में जाट कभी कांग्रेस की तरफ तो कभी भाजपा की तरफ रहे हैं। दोनों ही पार्टियों ने जाट समुदाय को साधने की पूरी कोशिश की है। ऐसे में दुष्यंत चौटाला के मैदान में आने से जाट वोटरों को तीसरा विकल्प मिलेगा और जजपा दोनों दलों के वोट में सेंधमारी करने की पूरी कोशिश करेगी।
इन जगहों पर जाट वोटरों का दबदबा
चुरू, नागौर, झुंझनू, सीकर, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, अजमेर, गंगानगर, जोधपुर, पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़, सवाई माधोपुर, दौसा, अलवर और धौलपुर।
पार्टी इन लोगों को शामिल कर चुकी है
जजपा लगातार सेंधमारी करने में जुटी है। पार्टी में अब तक पूर्व विधायक प्रतिभा सिंह, डॉ मोहन सिंह नदवई, सुभाष धोलिया, कांग्रेस विधायक वीरेंद्र सिंह की पत्नी रीता सिंह शामिल हो चुकी हैं। प्रतिभा सिंह दो बाद निर्दलीय विधायक रह चुकी हैं। डॉ. मोहन सिंह नदवई की पत्नी दो बार भरतपुर जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं। धोलिया कांग्रेस नेता हैं और एनएसयूआई के जरिये अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।