हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला।
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राजस्थान में जननायक जनता पार्टी (जजपा) को 0.14 फीसदी वोट मिले हैं, जो नोटा को मिले कुल वोट प्रतिशत से भी कम हैं। नोटा को कुल 0.96 फीसदी वोट मिले हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने राजस्थान में 88 उम्मीदवार उतारे थे। उसे भी करारी हार का सामना करना पड़ा है। उसे कुल 0.38 फीसदी वोट मिले। हालांकि जजपा को यह वोट सिर्फ 19 विधानसभा से मिले हैं, जबकि नोटा का यह वोट प्रतिशत कुल 199 विधानसभा क्षेत्र का है।
पार्टी फिलहाल अपने वोटों से संतुष्ट नजर आ रही है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जो जनादेश मिला है, उसे स्वीकार करते हैं। पार्टी ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा। हमारे पास एक भी कार्यकर्ता व बूथ एजेंट नहीं था फिर भी इतने वोट पा गए।
राजस्थान में जजपा की शुरुआत हो चुकी है। हमसे पुराने दल और बड़े दल भी मैदान में थे। उनके मुकाबले जजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है। पार्टी के एक मात्र उम्मीदवार किशोर महारिया को 23851 वोट मिले हैं, जो फतेहपुर विधानसभा में तीसरे स्थान पर रहे हैं। इससे पहले महारिया साल 2013 में निर्दलीय चुनाव जीते थे। 2008 में उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे।
जजपा उम्मीदवार पत्नी की जमानत जब्त, पति जीता
दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बेहद दिलचस्प मुकाबला चुनाव देखने को मिला। जजपा से रीटा सिंह चुनाव लड़ रहीं थीं जबकि कांग्रेस से उनके पति वीरेंद्र सिंह मैदान में थे। मगर जीत पति की हुई। वीरेंद्र सिंह ने कड़े मुकाबले में भाजपा के उम्मीदवार को आठ हजार वोटों से हराया। वहीं, उनकी पत्नी रीटा सिंह को 1567 वोट मिले। दांतारामगढ़ से जजपा प्रमुख अजय चौटाला विधायक भी रह चुके हैं।
हरियाणा में तैयारी में जुटी जजपा
राजस्थान में आए परिणाम के बाद जजपा अपनी तैयारियों में जुट गई है। जजपा आठ दिसंबर को सिरसा में आयोजित होने वाली छठी लोकसभा रैली की तैयारी में जुट गई। जजपा अब तक सोनीपत, फरीदाबाद, भिवानी, महेंद्रगढ़ और कुरुक्षेत्र में सफल रैली कर चुकी है। पार्टी का कहना है कि राजस्थान और हरियाणा में हालात काफी अलग हैं। हरियाणा में पार्टी का मजबूत संगठन है, जबकि राजस्थान में पार्टी विस्तार के मोड पर है। इसलिए दोनों राज्यों की तुलना करना ठीक नहीं है।