जाटों सहित 6 जातियों को आरक्षण पर लगी रोक हटाने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है, वहीं मामला एक बार फिर से उलझ गया है। पीआईएल बेंच के सामने शनिवार को याची पक्ष द्वारा दी गई दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतिम दौर में आकर याची की दलीलें ही किसी और तरफ जा रही है।
हाईकोर्ट ने कहा कि जहां से चले थे अब ऐसा लगता है वहीं दोबारा आकर खड़े हो गए हैं। हाईकोर्ट ने इसपर याची पक्ष पर सवालिया निशान लगाते हुए जनहित याचिका दाखिल करने का आधार बताने के आदेश जारी किए हैं।
हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट के इन आदेशों के चलते झटका लगा और सरकार ने आगे केस सुनने से पहले आरक्षण पर लगी रोक को हटाने की अपील की गई। हाईकोर्ट ने इस अपील को नजर अंदाज करते हुए फिलहाल रोक नहीं हटाने का निर्णय लिया है।
हाईकोर्ट ने कहा, याचिका में कोई औचित्य नहीं बनता
जाट आरक्षण को लेकर महापंचायत
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शनिवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही याची पक्ष द्वारा दलीलें आरंभ की गई। याची पक्ष द्वारा दाखिल की गई अर्जी जब बेंच के सामने सुनवाई के लिए पहुंची तो हाईकोर्ट ने कहा कि इस अर्जी का इस याचिका में कोई औचित्य ही नहीं बनता है।
इसके बाद से ही मामला उलझना शुरू हो गया। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि अब बेंच के मन में यह सवाल है कि क्या याची ने यह याचिका जनहित में दाखिल की है या निज हित में।
इस दौरान याची पक्ष ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के साथ ही यह मामला धर्म सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों की भी उल्लंघना है। हाईकोर्ट ने इसपर कहा कि अभी तक यह मामला आरक्षण पर कमिशन की भूमिका को लेकर चल रहा था और अब याची पक्ष की दलीलें ही बदल गई हैं और वे संविधान के अनुरूप इसकी वैधता को लेकर बहस कर रहा है।
नए सिरे शुरू करनी होगी सुनवाई
जाट नेता
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कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार याची की दलीलें बदली हैं उसके चलते अब ऐसा लगता है कि इस लिहाज से नए सिरे से सुनवाई आरंभ करनी होंगी। हाईकोर्ट ने याची पक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब याची यह साबित करे कि इस याचिका को दाखिल करना उसका अधिकार है।
ऐसे में समाज के लिए किया गया कार्य, आय का साधन बताने के साथ ही अजैब सिंह व भारतीय होम्योपैथी केस में पीआईएल के लिए बनाए गए नियमों की पालना करने के बारे में जवाब दाखिल करें।
केस को लटकता देख हरियाणा सरकार की ओर से अपील की गई कि याचिका पर सुनवाई भले ही जारी रखी जाए पर जाटों सहित 6 जातियों को दिए गए आरक्षण पर लगाई गई रोक को हटा दिया जाए।
हाईकोर्ट ने इस अपील को नजर अंदाज करते हुए रोक हटाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को निर्धारित की है।