उपद्रव की आग में प्रदेश के लोगों ने भाईचारा ही नहीं खोया, रोजी-रोटी का सहारा भी गंवा चुके हैं। उपद्रवियों ने देखते ही देखते करोड़ों की संपत्ति को फूंक दिया। जिस कारोबार को खड़ा करने में पीढ़ियां खप गईं, वो उन्माद के तूफान में तिनके की तरह बह गया। बचे हैं तो सिर्फ बेबसी, लाचारी के आंसू और नफरत। नफरत और घृणा उनके खिलाफ भी जिन्होंने उनके चमन को उजाड़ दिया, गुस्सा उन पर भी जो उनकी बर्बादी को तमाशबीन होकर देखते रहे।
सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा छिन गया। हजारों कामगार बेरोजगार हो गए...कल तक जो मालिक थे आज वो राख के ढेर पर बैठे अपनी बेबसी को कोस रहे हैं। उनकी बेबसी मंगलवार को मरहम लगाने की आड़ में सियासत करने आए नेताओं पर गुस्सा बनकर फूटी।
रोहतक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व्यापारियों की पीड़ा सुनने आए तो लोगों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाकर रोष जाहिर किया। सीएम मुआवजे का आश्वासन देते रहे, नाकारा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया, उन्मादियों को न बख्शने की बात कही, लेकिन जातीय हिंसा की आग में सब कुछ खो चुके इन लोगों का गुस्सा कम न हुआ।
आखिरकार सीएम का बीच में भी भाषण छोड़कर जाना पड़ा। उधर डी पार्क के पास धरने पर बैठे व्यापारियों को सांत्वना देने पहुंचे रोहतक के पूर्व विधायक बीबी बतरा को व्यापारियों ने उलटे पांव भगा दिया।
दिल्ली में भूख हड़ताल छोड़कर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा भी शहरवासियों की पीड़ा जानने रोहतक आए। गुस्साए लोगों ने उनके आवास पर प्रदर्शन किया। भीड़ में से उन पर किसी ने जूता फेंक दिया। आखिरकार पुलिस को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर हुड्डा को वापस दिल्ली जाने का कहना पड़ा।
पानीपत में व्यापारियों आधे दिन बाजार बंद रखकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। सोनपीत, करनाल, असंध, कैथल, जींद, झज्जर में प्रदर्शन हुए।