हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन से पैदा हुए हालात पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक अन्य जस्टिस अमित रावल ने स्वत: संज्ञान लिया है।
अदालत की इस बेंच ने मंत्रिमंडल के सदस्यों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्या ऐसे हालातों में जनप्रतिनिधि होने के नाते नुकसान की भरपाई उन्हीं से नहीं कराई जानी चाहिए? यह भी सवाल किया कि क्या ऐसे हालात के लिए मंत्रिमंडल की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?
बेंच ने हरियाणा में उपद्रव को लोकतंत्र की हत्या बताया है। बेंच ने कहा है कि राज्य सरकार हालात पर काबू पाने में विफल रही है।
ऐसे में केंद्र सरकार से भी जवाब मांगने की जरूरत है। बेंच ने तल्खी से कहा कि राज्य सरकार को इसका जवाब देना चाहिए कि मुरथल में महिलाओं से दुर्व्यवहार के मामले में अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई।
इन सबसे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ऐसे हालातों के पीछे अधिकारियों की भी मिलीभगत है। बता दें कि जस्टिस रावल से पहले जस्टिस एनके सांघी भी आरक्षण आंदोलन पर स्वत: संज्ञान ले चुके हैं।