पंजाब दौरा कर रहे दिल्ली सीएम और 'आप' के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल को कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक सलाह दी। उन्होंने कहा कि वह पंजाब के चक्कर में न पड़ें। उन्हें पंजाब में शासन करने के सपने देखने की बजाए बीते दस दिनों से पानी को तरस रहे दिल्लीवासियों की तकलीफों पर ध्यान देना चाहिए।
अमरिंदर ने कहा कि यह केजरीवाल के चरित्र की विशेषता है कि वह या तो दूसरों पर आरोप लगाते हैं या फिर हालातों से भाग जाते हैं। हरियाणा में जाट आंदोलन खत्म होने से 10 दिन बाद भी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं पहुंच सकी है, लेकिन उनको वोट देकर सत्ता में लाने वाले लोगों के साथ खड़े होने और उनकी समस्याओं का हल निकालने की कोशिश करने की बजाय केजरीवाल पंजाब में झूठे सपने बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
केजरीवाल का दिल उन हजारों पंजाबियों के लिए क्यों नहीं दुखता, जो हरियाणा में हिंसा और उपद्रव का शिकार हुए। पीड़ितों के पास जाना और उन्हें हौसला देना तो दूर की बात, केजरीवाल ने पीड़ितों के जख्मों पर मरहम रखने के लिए एक शब्द भी बोलने की जरूरत नहीं समझी।
दलित भीम टांक मौत के बाद उनके परिजनों को नौकरी देने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि ऐसे कितने पीड़ितों के पास केजरीवाल गए हैं और उनको नौकरियां ऑफर कीं।
उन्होंने केजरीवाल से सवाल किया कि क्या आप रोहित वेमूला के पारिवारिक सदस्यों को भी इसी तरह का ऑफर करेंगे, जिस दलित लड़के ने हैदराबाद युनिवर्सिटी में आत्महत्या की थी? पूर्व मुख्यमंत्री ने केजरीवाल से सवाल किया कि क्यों वह अंबाला से संबंधित पठानकोट आतंकवादी हमले के पीड़ित गुरसेवक सिंह के घर नहीं गए, जबकि पठानकोट के बाकी दोनों पीड़ितों के पास गए और उन्हें सहायता राशि भी दी।