जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा के भड़की हिंसा के असली खिलाड़ियों की पहचान हो गई, जिन्होंने आग में घी डालने का नाम किया। आंदोलन के दौरान अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही और चूक की जांच के लिए गठित प्रकाश सिंह कमेटी 17 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। अब तक की जांच के तहत कमेटी ने प्रदेश के आंदोलन प्रभावित आठ जिलों का दौरा कर चुकी है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में माना कि जांच के दौरान जातीय भेदभाव का वीभत्स रूप सामने आया। जांच में कई कर्मियों और अधिकारियों की लापरवाही या जान बूझकर की गई गलतियां सामने आई हैं। उन्होंने माना कि सरकार को कमेटी की ओर से रिपोर्ट सौंपने के बाद उनपर गाज गिरना तय है। हालांकि पहले से ही सरकार विभागीय अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई कर रही है।
पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने बेबाक लहजे में कहा कि आंदोलन के दौरान कुछ अधिकारियों और कर्मियों ने कई ऐसे ज्वलंत उदाहरण पेश किए हैं, जिनकी तारीफ कम है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों और कर्मियों को पुरस्कृत करने की भी सरकार से सिफारिश करेंगे।
पूर्व डीजीपी ने बताया कि अब तक जींद, भिवानी, झज्जर, सोनीपत, रोहतक, हिसार, कैथल सहित आठ जिलों का दौरा कर चुके हैं। हरेक शहर में रोजाना २५० से अधिक लोगों से जांच के सिलसिले में मुलाकात कर, आंदोलन के दौरान अधिकारियों और कर्मियों के बर्ताव को लेकर जानकारियां हासिल की गईं। एक सवाल के जवाब में पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने माना कि रोहतक में इसका वीभत्स चेहरा दिखा। पहले भी कई बड़े मामलों की जांच से जुड़े रहे डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा कि इस आदोंलन के दौरान शायद पहली बार यह सामने आया कि जातीय दंगे ने अलग रूप ले लिया।
उन्होंने कहा कि अमूमन आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए, लेकिन इसमें निजी संपत्ति को निशाना बनाते हुए व्यक्गित तौर पर भी समुदाय या व्यक्ति विशेष को टारगेट किया गया। उन्होंने इस मामले में किसी तरह की साजिश के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि चूंकि यह कमेटी की जांच के दायरे में नहीं है, इसलिए टिप्पणी नहीं कर सकते। लेकिन उन्होंने यह जरूर माना कि आंदोलन के दौरान कई जगहों पर भेदभाव के मामने सामने आए हैं और इसमें अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही की सामने आई है।