जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को एक नाबालिग लड़की का एमएमएस मिला था। इसके बाद की गई जांच में पता चला कि सबीना नामक महिला अपने घर में देह व्यापार का अड्डा चलाती है। पुलिस ने उस घर में छापा मारकर एक दर्जन लड़कियां बरामद की थीं। इनमें से एक लड़की नाबालिग थी। उस लड़की ने खुलासा किया कि घर की मालकिन शबीना युवतियों को मंत्री और पुलिस अफसरों के पास भेजती थी।
सीबीआई ने चार सितंबर 2006 को एक दर्जन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मामले में कुल नौ चार्जशीट दायर की गई थीं, जिनमें पुलिस ने दर्जन भर से अधिक आरोपी बनाए थे। इन सभी की सुनवाई चल रही है। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 376, आईटी एक्ट की धारा 67 और इम्मोरल ट्रैफिकिंग की धारा 3, 4, 5 व आईपीसी की धारा 120-बी के तहत केस दर्ज किया था।
सितंबर-2006 में मामले को चंडीगढ़ जिला अदालत में ट्रांसफर दिया गया था। चंडीगढ़ की सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में केसी पाधी, जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी मोहम्मद अशरफ मीर सहित शब्बीर अहमद लवाय उर्फ शब्बीर काला, शब्बीर अहमद लोन और मसूद अहमद को दोषी घोषित कर सभी को दस-दस वर्ष की सजा सुनाई थी।
फैसले को इन सभी ने न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायालय ने सिर्फ केसी पाधी की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले में दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है, जबकि अन्य की अपीलें खारिज करते हुए उन सभी की सजा बरकरार रखी है।