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जैनमुनि विधानसभा से करेंगे ‘जातिवाद’ खत्म करने की शुरुआत

Thu, 31 Mar 2016 09:33 AM IST
मोनिल शर्मा/अमर उजाला, रोहतक।
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मुनि तरुण सागर - फोटो : file
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बैंगलुरू से तीन हजार किलोमीटर की पद यात्रा कर प्रदेश में पहली बार पहुंचे क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत मुनि तरुण सागर पंजाब और हरियाणा के मंत्रियों और विधायकों को कड़वे प्रवचन देंगे। वे इस बार चंडीगढ़ में चातुर्मास करेंगे और इसी दौरान विधानसभा में दोनों राज्यों के होने वाले संयुक्त सत्र में धर्म सभा कर जातिवाद को खत्म करने की शुरुआत करेंगे। मुनि तरुण सागर ने झज्जर रोड स्थित दिगंबर जैन जती में विशेष बातचीत के दौरान यह बात कही।
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जैन मुनि ने कहा कि देश की लोकसभा और प्रदेश की विधानसभाएं इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां देश की नीतियों व नियमों का निर्धारण किया जाता है। यहां बैठे हुए लोग भ्रष्ट, बेईमान और कमजोर होंगे तो उससे समाज व देश दोनों प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा से मुलाकात हुई। इन्होंने हरियाणा विधानसभा के संयुक्त सत्र में कड़वे प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि अगर पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान न दिया जाएं तो आपसी मतभेद होंगे ही नहीं। प्रदेश में पिछले दिनों उपद्रव के चलते जो कुछ भी हुआ है, उससे चारों ओर अशांति का माहौल बन गया है। भाईचारे को भी काफी चोट पहुंची है। इसी चोट को ठीक कर दिलों में फिर से प्रेम रूप रक्त का संचार करने के लिए ही वे हरियाणा की धरती पर आए हैं।

तनाव नहीं लूंगा, ये चार सपने भी होंगे पूरे
20 वर्ष पहले मुनि ने जो चार सपने देखे थे, वे सभी साकार हो गए हैं। इन सपनों में भगवान महावीर को मंदिरों से निकालकर चौराहे पर लाना, लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करना, भारतीय सेना से रूबरू होना और लोकसभा व विधानसभाओं में प्रवचन देना है। इन सपनों के पूरा होते ही मुनि ने चार और नए सपने देखे हैं, जिसमें 10 लाख लोगों को मांसाहार व शराब छुड़वाकर उन्हें शाकाहारी बनाना, मस्जिद व चर्च में प्रवचन कर एकता का संदेश देना, देश की सरहद पार नेपाल आदि देशों तक पैदल सफर करना और आरएसएस के गणवेश को चमड़े के जूते व बेल्ट से मुक्त करना है। मुनि ने कहा कि वे तनाव नहीं लेंगे और ये चार सपने भी जरूर पूरे होंगे। इसमें से आरएसएस के गणवेश को जूते व बेल्ट से मुक्त कराने का सपना पूरा हो गया है।
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संस्कार शिविर में ये तीन शपथ लेंगे बच्चे
मुनि ने कहा कि वर्ष 2020 तक लगने वाले संस्कार शिविरों में 10 लाख बच्चों को नैतिक शिक्षा की तीन शपथ दिलाई जाएगी।  संस्कार शिविर की शुरुआत पिछले साल रायपुर में की गई थी। अब तक करीब छह लाख बच्चों को शपथ दिला चुके हैं। इसी कड़ी में 4 अप्रैल को रोहतक में संस्कार शिविर लगेगा, जिसमें 50 निजी व सरकारी स्कूलों के बच्चे भाग लेंगे। तीन शपथ में आत्महत्या नहीं करना, मां-बाप को वृद्धाश्रम में नहीं भेजना और राष्ट्र के प्रति गद्दारी नहीं करना शामिल है।

इतना लायक न बनाओ, कि तुम्हें नालायक समझे
मुनि ने कहा कि शिक्षा का स्तर जरूर बढ़ रहा है, लेकिन संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजह संयुक्त परिवारों का टूटना और दोनों अभिभावकों का कामकाजी होना है। बच्चों को चांद-तारे छूने की शिक्षा देना नहीं, बल्कि मां-बाप के चरण छूने सिखाने चाहिए। अगर वे चांद-तारे तक पहुंच गए तो छू मंतर हो जाएंगे। उन्हें खूब पढ़ाओ-लिखाओ, लेकिन इतना लायक भी न बनाओ कि तुम्हें नालायक समझने लगे।

नहीं करेंगे विदेश यात्रा
13 वर्ष की उम्र में जैन सन्यास और 20 वर्ष की उम्र में दिगंबर जैन मुनि की दीक्षा लेने वाले राष्ट्र संत अपने जीवन में कभी भी विदेश यात्रा नहीं करेंगे। चूंकि, विदेश जाने के लिए सड़क मार्ग नहीं है और वे हमेशा पद यात्रा कर रहे हैं, इसलिए विदेश की यात्रा नहीं करेंगे। वे अब तक 15 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं।
 
17 को पानीपत में करेंगे मंगल प्रवेश
जैन मुनि रोहतक पुलिस लाइन में 6 अप्रैल को कड़वे प्रवचन देंगे। इसके बाद पानीपत के लिए पद यात्रा शुरू करेंगे। वे 17 अप्रैल को पानीपत पहुंचेंगे और 19 अप्रैल को मॉडल टाउन स्थित जैन समाज में महावीर जयंती के कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान 21 से 24 अप्रैल तक प्रवचन देंगे। इसके बाद करनाल, अंबाला और पंचकूला से होते हुए चंडीगढ़ में चातुर्मास के लिए जाएंगे।

कड़वे प्रवचन का जल्द आएगा नौंवा भाग
राष्ट्र संत द्वारा कड़वे प्रवचन पर लिखित आठ किताबों की सात लाख प्रतियां अब तक बिक चुकी हैं। इसका नया संस्करण अप्रैल में आना वाला है। इस नए संस्करण का विमोचन पानीपत में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा होगा। वहीं, मुनि कड़वे प्रवचन का 9वां भाग भी लिख रहे हैं और डेढ़ वर्ष बाद इस किताब के बाजार में आने की उम्मीद है।

विरोध सही, लेकिन अर्थ को गलत समझकर नहीं
आरक्षण मामले में मुनि ने हंस पिछड़ रहे हैं और कौवे आगे निकल रहे हैं का बयान दिया। इसका रोहतक में एएमवीए ने काफी विरोध भी किया। इस मामले में मुनि ने कहा कि विरोध करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन अर्थ को गलत समझकर नहीं। उन्होंने कहा कि जिन वर्गों को आरक्षण दिया गया है, वहां भी कम क्षमतावान लोग पढ़े-लिखे लोगों पर राज कर रहे हैं। यह जनता और देश दोनों के हित में नहीं है।
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