डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म का दोषी करार दिया गया था। उसके बाद पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में भी उम्रकैद की सजा हुई है। तभी से राम रहीम सुनारिया जेल में बंद है।
हाईकोर्ट की ओर से जेल अधीक्षक राम रहीम को पैरोल देने के मामले में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था। जेल अधीक्षक की ओर से मामले की सुनवाई कर पैरोल देने को निरस्त कर दिया गया है। - पंकज यादव, मंडलायुक्त , रोहतक।
हाईकोर्ट से सोमवार को इस संबंध पत्र मिलने के बाद एसपी सिरसा व सीएमओ सिरसा की रिपोर्ट के आधार पर पैरोल निरस्त करने की रिपोर्ट भेज दी गई है। - सुनील सांगवान, जेल अधीक्षक सुनारिया।
खेतीबाड़ी के लिए 42 दिन की पैरोल मांग चुका है राम रहीम
इससे पहले भी राम रहीम ने खेतीबाड़ी के लिए 42 दिन की पैरोल मांगी थी। जिसमें उपायुक्त सिरसा की रिपोर्ट मांगी गई थी। मामला तूल पकड़ने पर राम रहीम ने पैरोल की याचिका वापस ले ली थी।
डेरा प्रमुख राम रहीम को उनकी मां नसीब कौर की खराब तबीयत का हवाला देकर पैरोल की देने अर्जी हाईकोर्ट में लगाई थी, लेकिन रोहतक जेल अधीक्षक ने शुक्रवार को पैरोल देने से इनकार दिया। दरअसल, रोहतक जेल अधीक्षक ने सिरसा के एसपी से राम रहीम की पैरोल देने को लेकर दो बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। यह पूछा गया था कि डेरा प्रमुख की मां की तबीयत वास्तव में गंभीर है या नहीं। यदि गंभीर है तो उनकी देखभाल करने वाला कोई पारिवारिक सदस्य है या नहीं। साथ ही एसपी सिरसा से इस संबंध में कानून-व्यवस्था की जानकारी मांगी गई थी।
एसपी ने यह रिपोर्ट सिरसा डीसी अशोक कुमार गर्ग के पास भेजी
सिरसा डीसी ने सीएमओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय चिकित्सा बोर्ड बनाया। साथ ही एसडीएम शालिनी चेतल से यह रिपोर्ट मांगी कि वे परिवार में और कौन-कौन सदस्य हैं, जो उनकी देखभाल कर सकते हैं। जानकारी अनुसार चिकित्सा बोर्ड ने उनकी मां नसीब कौर की हालत को गंभीर नहीं माना। वहीं एसडीएम की रिपोर्ट में उनके पारिवारिक सदस्यों की जिक्र किया गया कि उनके पारिवारिक सदस्य डेरा प्रमुख की मां की देखभाल कर सकते हैं।
क्योंकि जब से डेरा प्रमुख जेल में है, तब से बाकी पारिवारिक सदस्य ही उनकी देखभाल कर रहे हैं। दोनों रिपोर्ट डीसी ने एसपी के पास भेज दी। वहीं एसपी सिरसा अरुण सिंह ने भी डेरा प्रमुख को पैरोल मिलने पर कानून-व्यवस्था बिड़ने की आशंका जताई। इनके आधार पर रोहतक जेल अधीक्षक ने डेरा प्रमुख को पैरोल देने से इनकार कर दिया।
बता दें कि डेरा प्रमुख की पत्नी हरजीत कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उनकी सास नसीब कौर को हार्ट अटैक आया था और उनकी एंजियोग्राफी भी होनी है। वह 85 साल की है और उसकी इच्छा है कि वह इलाज के समय उसका बेटा गुरमीत सिंह उसके पास हो। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक सुनारिया जेल से जवाब मांगा था, लेकिन जेल अधीक्षक ने इस मामले में सिरसा एसपी अरुण सिंह से रिपोर्ट मांगी।
ऐसे में सिरसा के एसपी ने डीसी सिरसा को पत्र लिखकर डेरा प्रमुख की मां का मेडिकल करवाने के लिए कहा। डीसी सिरसा के निर्देश पर सीएमओ गोबिंद गुप्ता ने बोर्ड गठित करके डेरा प्रमुख की मां की मेडिकल जांच की। सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट डीसी सिरसा को सौंप दी है। सिरसा के डीसी अशोक कुमार गर्ग ने यह रिपोर्ट एसपी सिरसा को सौंप दी, जो रोहतक जेल अधीक्षक के पास भेजी गई।
दो बार पैरोल मांग चुका डेरा प्रमुख
रोहतक जेल में सजा काट रहा डेरा प्रमुख इससे दो बार पैरोल मांग चुका है। एक बार उसने अपनी दत्तक पुत्री की शादी के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। इसके बाद दूसरी बार पिछले कृषि कार्य के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद डेरा प्रमुख ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
डीसी की अध्यक्षता में चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड की मेडिकल रिपोर्ट और लॉ ऐंड ऑर्डर की रिपोर्ट बनाकर जेल अधीक्षक के पास भेज दी थी।
- अरुण सिंह, एसपी सिरसा