इस घटना में अपराधी गुरजीत सिंह महलकलां शामिल था। इसी तरह 2016 में फिर बठिंडा जेल में हिंसा हुई। 2011 में कपूरथला जेल में हिंसा हुई। अमृतसर जेल में तीन बार (7 जनवरी 2008, 31 जनवरी 2008 और 29 अगस्त 2008) दंगे हुए। पंजाब की जेलों में सीआरपीएफ तैनात के बारे में जेल मंत्री ने कहा कि उनकी तरफ से पहले ही इसकी मांग की जा चुकी है, जिसे लेकर 8 अक्तूबर 2018 को केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया गया था।
उन्होंने सुखबीर बादल से कहा कि वह केंद्र सरकार में सहयोगी है और यदि वह सचमुच पंजाब की जेलों की सुरक्षा संबंधी चिंतित हैं तो अपने सहयोगियों को कहकर पंजाब की उच्च सुरक्षा जेलों में सीआरपीएफ की तैनाती करवाएं। अंत में रंधावा ने यह भी लिखा कि उनकी तरफ से लिखे इस पत्र की किसी भी दलील संबंधी यदि कोई स्पष्टीकरण लेना हो तो, वह ले सकते हैं ताकि उनके ज्ञान में और वृद्धि हो सके।
कैदियों की तुलना बहिबल कलां में निर्दोष सिखों से करना गलत
रंधावा ने कहा कि सुखबीर बादल ने लुधियाना में कैदियों द्वारा हिंसा के बाद की गोलाबारी की तुलना बहिबल कलां गोलीकांड से करके सिख कौम की तौहीन की है, जिसके लिए वह समूची सिख कौम से माफी मांगे।
उन्होंने कहा कि बहिबल कलां में शांतिपूर्ण तरीके से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के बेअदबी के दोषियों को पकड़ने की मांग करने वाले गुरबानी कीर्तन कर रहे सिखों की तुलना कैदियों के साथ बिल्कुल नहीं की जा सकती। अकाली दल के प्रधान द्वारा ऐसी तुलना कतई बर्दाश्त होने वाली नहीं है।