अग्निकांड के बारे में जानकारी देते पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ पीजीआई में बीते 9 अक्तूबर को हुए अग्निकांड की जांच रिपोर्ट आ गई है। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने अग्निकांड की जांच रिपोर्ट को साझा करते हुए कई अहम जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग विभाग और फायर सेफ्टी विंग की चूक के कारण ही आग लगी थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय सुधार का मौका दिया है ताकि मरीजों का इलाज बाधित न हो।
पीजीआई निदेशक ने कहा कि भविष्य में आग से बचाव के लिए पीजीआई में जल्द ही विश्वस्तरीय हीट सेंसिटिव फायर इंस्टिंग्विशर लगाए जाएंगे। ये फायर इंस्टिंग्विशर गर्मी पाकर खुद ही पाउडर स्प्रे करेंगे। इससे आग से बचाव में काफी मदद मिलेगी। अगले 20 दिनों में संस्थान में अलग-अलग स्थानों पर 1700 फायर इंस्टिंग्विशर लगाए जाएंगे।
ऑनलाइन होंगे मरीजों के रिकॉर्ड
प्रो. लाल ने बताया कि अब अस्पताल में फ्लेम रिटार्डेंट बैटरियों को स्थानांतरित करेंगे, जो इस तरह की दुर्घटना को रोकेंगी क्योंकि उसमें वोल्टेज फलक्चुएशन के दौरान कोई परेशानी नहीं होती। वहीं, उन्होंने आग से बचाव के लिए मरीजों के रिकार्ड ऑनलाइन करने की कवायद को तेज करने की बात भी कही। बताया कि नेहरू अस्पताल के बाद एडवांस आई सेंटर में लगी आग ने आंखें खोल दीं हैं।
यह भी पढ़ें: Punjab: पीएम मोदी को दिए स्वर्ण मंदिर के मॉडल की नीलामी पर रार, सुखबीर बोले-नहीं संभाल सकते तो वापस कर दें
इस दौरान इंजीनियरिंग विभाग व फायर सेंफ्टी के प्रमुख भी मौजूद रहे। प्रो. लाल ने उन्हें गलतियों को तत्काल सुधारने की सलाह दी। बताया कि नेहरू अस्पताल के बैटरी रूम की 29 सितंबर को जांच की गई थी। वहीं आई सेंटर की बैटरियां दो महीने पहले बदली गईं थीं। इसके बावजूद दोनों जगह पर आगजनी हुई इसलिए अब बदली गई बैटरी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं लेकिन साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण उसके बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं।
20 हॉट स्पॉट को स्थानांनतरित करने का काम शुरू
प्रो. विवेक ने बताया कि कमेटी द्वारा अलग-अलग भवनों में चिह्नित किए गए हॉट स्पॉट को स्थानानंतरित करने का काम शुरू कर दिया गया है। एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की एचडीयू के बाहर की दीवार को भी तोड़ दिया गया है जिससे बाहर निकलने में कोई बाधा न आए। मरीजों के रिकॉर्ड के साथ ही कागजी साक्ष्यों को सोलन की कंपनी से टेंडर कर बाहर भेजा जा रहा है। कुछ महीनों में यह काम पूरा हो जाएगा। वहीं सभी बैटरी रूम मुख्य भवनों से बाहर या एक किनारे स्थापित किए जाएंगे। यह भी योजना बनाई जा रही है कि एक ही जगह मुख्य बैटरी रूम बनाने के बजाय अलग-अलग फ्लोर पर इन्हें स्थापित किया जाए। तीन महीने में सभी यूपीएस और बैटरी भी रिप्लेस कर दी जाएंगी साथ ही आपदा प्रबंधन के अंतर्गत रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए भी फायर ड्रिल में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है। एग्जिट डोर एक तरफ से ही खुलेंगे।
जल्द शुरू होगा जीर्णोद्धार
प्रो. विवेक लाल ने नेहरू अस्पताल के भवन के जीर्णोद्धार की बात भी बताई। कहा कि मरीजों का इलाज बाधित न हो इसके लिए सारंगपुर सैटेलाइट सेंटर की मदद ली जाएगी। जिस भी एरिया का जीर्णोद्धार करना होगा उसे वहां स्थानानंतरित कर दिया जाएगा। इसे लेकर कार्य योजना बनाई जा रही है। केंद्र से बजट स्वीकृत होते ही काम शुरू किया जाएगा क्योंकि संस्थान के 70 साल पुराने जिन भवनों की फायर एनओसी नहीं है उनमें सुरक्षा की दृष्टि से जीर्णोंद्धार कराना जरूरी है।
जांच में ये कमियां मिलीं
- बैटरी रूम में सिविल का कार्यालय
- बैटरी रूम के बाहर मुख्य स्टोर का सामान फैला होना
- बैटरी रूम के बाहर चाबी उपलब्ध न होना
- 29 सितंबर को बायोमेडिकल डिविजन ने बैटरी रूम की जांच की तो कमी क्यों नहीं मिली
- आई सेंटर में रिकार्ड रूम के पास बैटरी रूम क्यों बनाया गया
- फायर सेफ्टी ने चेकिंग के दौरान कभी आपत्ति क्यों नहीं जताई कमियों पर
जांच कमेटी के सुझाव
- अग्निशमन वाहनों के लिए पहुंच मार्ग/निर्दिष्ट अग्निशमन क्षेत्र खुले और खाली रखे जाएं
- नई ओपीडी में भूतल पर अग्नि निकास मार्गों को कांच/लकड़ी के दरवाजों से बदला जाए
- भारी वाहनों के आवागमन के लिए नेहरू अस्पताल के सामने क्रॉसिंग रोड बनाई जाए
- अस्पताल के विभिन्न ब्लॉकों में अग्नि निकास दरवाजे इस तरह से बनाए जाएंग कि वे अंदर के बजाय बाहर की ओर खुलें
- संकट की स्थिति में सभी बंद स्थानों जैसे ओटीएस, आईसीयूएस वार्ड, लंबे गलियारों में उचित निकास की आवश्यकता हो
- गलियारों/सीढ़ियों को मुक्त आवाजाही के लिए साफ रखा जाए और वहां आग लगने का खतरा पैदा करने वाली कोई भी वस्तु नहीं रखी जाए
- मुक्त आवागमन के लिए कैटवॉक स्पष्ट होना चाहिए।
- मुख्य स्टोर के लिए अधिक स्थान अथवा अलग स्टोर की तत्काल व्यवस्था हो
- यह प्रस्तुत किया गया था कि नेहरू अस्पताल की इमारत 65 साल पुरानी है और अब से, मौजूदा बिजली केबलों, मैनिफोल्ड पाइपलाइनों और एयर कंडीशनिंग फिटिंग/प्रतिष्ठानों को नया रूप देने की जरूरत है।
- साइनेज को अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया जाना चाहिए
- अप्रिय घटना से बचने के लिए मेन ओटी में 5वीं मंजिल पर स्थापित यूपीएस का जोखिम स्तरीकरण किया जाना चाहिए क्योंकि यह उचित रूप से काम नहीं कर रहा
- आग से बचने का मार्ग चौथी और पांचवीं मंजिल, मुख्य ओटी, नेहरू अस्पताल में बनाया जाए