पंजाब में पूर्व सरकार के दौरान हुए सैनिटाइजर घोटाले को लेकर जांच शुरू हो गई है। राजस्व विभाग ने इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज मूल खरीद अनुमति पत्र के साथ स्वास्थ्य विभाग से तलब कर लिए हैं। साथ ही कोरोना काल के दौरान आवंटित बजट में से 95 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र की भी मांग राजस्व विभाग ने की है। इस मामले में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ओपी सोनी पर सैनिटाइजर खरीद की अनुमति देने का आरोप है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार चुनाव के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से महंगे दाम पर सैनिटाइजर की खरीद का मामला उजागर हुआ है। चुनाव आयोग के लिए 1.80 लाख बोतलें 54.54 रुपये प्रति बोतल की दर पर खरीदी गई थी, जबकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब तीन गुना अधिक कीमत पर 160 रुपये प्रति बोतल के हिसाब से खरीदा गया।
सैनिटाइजर खरीद की अनुमति पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ओपी सोनी द्वारा दी गई। इस मामले के उजागर होने के बाद अब राजस्व विभाग ने पूरे मामले की स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब कर ली है। राजस्व विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज मूल प्रति के साथ एक सप्ताह में देने को कहा है।
आज रखेंगे सोनी अपना पक्ष
सैनिटाइजर घोटाले के आरोपों के बीच पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ओपी सोनी शुक्रवार को इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे। हालांकि उन्होंने बुधवार को अपना पक्ष रखने के लिए पत्रकार वार्ता आयोजित की थी लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया था।
वापस मांगी 95 करोड़ की राशि
कोरोना काल में राजस्व विभाग की ओर से संक्रमण से लड़ने के लिए 571 करोड़ रुपये का फंड विभिन्न मदों में दिया गया था। अभी तक 475.83 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। इसके विभाग द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र भी जारी किए हैं लेकिन शेष 95 करोड़ रुपये की राशि के प्रमाण पत्र अभी नहीं दिए गए हैं। इसके बाद राजस्व विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से बची राशि को वापस करने की मांग की है।