पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां मामले में पंजाब विजिलेंस की जांच खनन विभाग तक पहुंच गई है। जांच में खनन अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया में वनभूमि के खसरा नंबर शामिल कर 40 करोड़ रुपये का घोटाला कर डाला। इस खुलासे के बाद विजिलेंस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब खनन विभाग तक कर दिया है।
पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां मामले में जांच के दौरान विजिलेंस ने हाल ही में जिंदापुर गांव में 25 एकड़ वन भूमि पर अवैध खनन का पता लगाया था। जांच में पता चला कि करीब 50 फुट गहरे गड्ढे खोदे गए और करीब 40 करोड़ रुपये का अवैध खनन किया गया। इस मामले में पुलिस ने पिछले साल जिंदापुर में अवैध खनन के आरोप में पूर्व सरपंच इकबाल सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इकबाल का नाम तब आया था जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी उसके घर आए थे और अपनी मां के साथ लंच किया था।
इस खुलासे के बाद दोनों पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में खनन विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। नतीजतन विजिलेंस ब्यूरो ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। ब्यूरो के अनुसार भ्रष्टाचार का यह मामला सिर्फ वन विभाग तक ही सीमित नहीं है। जांच के दौरान अवैध खनन को बढ़ावा देने में कुछ खनन अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। इस खुलासे के बाद अब खनन और वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से इन्कार कर रहे हैं।
वन भूमि और सतलुज से हुआ खनन
विजिलेंस जांच में पता चला है कि नीलाम किए गए खनन पट्टों की आड़ में वन भूमि और सतलुज नदी के किनारों पर अवैध खनन किया गया। अवैध खनन की यह प्रक्रिया 2018 से 2021 के बीच तक जारी रही।
खनन पट्टे की यह आवंटन प्रक्रिया
खनन पट्टे की नीलामी प्रक्रिया में उपायुक्त के अधीन गठित एक जिला खनन समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं, जिन्हें नीलामी अधिसूचना में खसरा नंबर शामिल करना सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है। फिलहाल विजिलेंस अधिकारी इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं कि खनन विभाग की नीलामी अधिसूचना में वनभूमि का खसरा नंबर कैसे शामिल किया गया।