पीयू के पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर पर महिला प्रोफेसर की ओर से लगाए गए सेक्सुअल हरासमेंट के आरोपों में दम नहीं दिखा। जांच कमेटी की ओर से पत्र जारी कर दिया गया है। यह पत्र प्रो. एके ग्रोवर को मिल गया है। कमेेटी ने कहा है कि महिला प्रोफेसर को कई बार जांच के लिए बुलाया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हो पाईं। इसलिए माना जा रहा है कि आरोपों में दम नहीं है। इसी के साथ प्रो. एके ग्रोवर ने राहत की सांस लेते हुए अब महिला प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पीयू वीसी प्रो. राजकुमार को पत्र लिखा है।
ये था पूरा प्रकरण
वर्ष 2015 में महिला प्रोफेसर ने पूर्व वीसी प्रो. ग्रोवर पर सेक्सुअल हरासमेंट के आरोप लगाए थे। दो से तीन बार शिकायत की गई थी। उपराष्ट्रपति के निर्देश पर एक स्वतंत्र कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी को वर्ष 2017 में मंजूरी मिली। प्रशासनिक अधिकारी नवराज संधू की अध्यक्षता में कमेटी ने अप्रैल 2018 को बैठक की। उसके चार बैठकें और हुईं। इसी बीच शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट का सहारा लिया। उसके बाद एक और जांच कमेटी गठित हो गई।
पहले की कमेटी की अध्यक्षता कर रहे आईएएस नवराज संधू सेवानिवृत्त हो गए और उसके बाद धीरा खंडेलवाल को जांच कमेेटी का अध्यक्ष बनाया गया। इस कमेटी ने महिला प्रोफेसर को अपनी बात रखने का मौका दिया, लेकिन फिर भी वह नहीं पहुंचीं। इसी के साथ कमेटी ने माना है कि आरोपों में दम नहीं दिखता या महिला प्रोफेसर अपनी बात पर कायम नहीं हैं, इसलिए जांच बंद कर दी जाए। इस जांच की एक कॉपी चांसलर कार्यालय को भी भेजी गई है। यह जांच रिपोर्ट वहां स्वीकार हो गई है।
वीसी को लिखा पत्र, कहा- छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश, कार्रवाई हो
अब पूर्व वीसी ने पीयू वीसी प्रो. राजकुमार को पत्र लिखा है। कहा है कि वह पांच साल से इसको लेकर तनाव झेल रहे थे। उन पर झूठे आरोप लगाए गए। उन्होंने कई कानूनों का हवाला दिया और महिला प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। मालूम हो कि यह मामला पांच सालों से चर्चा का विषय बना हुआ था। सभी की नजर इस पर थी कि इस प्रकरण में क्या सच्चाई है, लेकिन कमेटी के मुताबिक आरोपों में दम नहीं दिखा। कमेटी की रिपोर्ट सामने आते ही पीयू में यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही यह पत्र सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने सार्वजनिक किया है।