कबड्डी खिलाड़ी संदीप नंगल अंबियां की हत्या
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पंजाब में माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। अब यह गैंगस्टर खेलों में अपनी दखल बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2019 में नॉर्थ इंडिया सर्कल स्टाल कबड्डी फेडरेशन ने राज्य के डीजीपी को अवगत करवाया था कि कबड्डी में गैंगस्टरों की एंट्री हो रही है, जो खतरनाक है। गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया कबड्डी लीग में अपना पैसा लगा रहा है। सारी कहानी कबड्डी पर वर्चस्व और विदेश से कबड्डी प्रमोटरों के माध्यम से भेजे जाने वाले करोड़ों रुपये की है।
सोमवार को संदीप नंगल अंबियां की हत्या भी इसी कड़ी का नतीजा है। पुलिस ने 2019 की शिकायत को गंभीरता से लिया होता तो कबड्डी में गैंगस्टरों की एंट्री को रोका जा सकता था। पंजाब में आयोजित होने वाली विभिन्न कबड्डी प्रतियोगिताओं में राज्य में सक्रिय गैंगस्टर पैसा लगाते हैं। गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया ने जेल से पंजाब में अपना एक अलग फेडरेशन ‘मेजर कबड्डी लीग’ गठित कर लिया था।
संदीप नंगल अंबियां भी इसी का हिस्सा बन गया था। संदीप नंगल अंबियां अपनी कबड्डी लीग को आगे बढ़ा रहा था। मेजर कबड्डी लीग में उन खिलाड़ियों को शामिल किया गया था जिन्हें राज्य की अन्य कबड्डी फेडरेशनों ने पॉजिटिव डोप टेस्ट के चलते प्रतिबंधित कर दिया था। इतना ही नहीं, गैंगस्टर और उसके साथियों द्वारा राज्य की कबड्डी फेडरेशनों को धमकाकर दबाव बनाया जाता रहा है कि उनके सुझाए खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में उतारा जाए। इसके पीछे भगवानपुरिया का मकसद अपने गिरोह का दायरा बढ़ाना और अपने साथ ताकतवर और दिलेर लोगों को जोड़ना है। वर्ष 1999 तक पंजाब में तीन कबड्डी फेडरेशन सक्रिय थे और प्रतियोगिताओं का आयोजन करते थे।
राज्य में कबड्डी ज्यादा लोकप्रिय होने की वजह से कई बड़े गैंगस्टर इस खेल से जुड़ गए। भगवानपुरिया जेल में बंद है। वह जेल से फोन पर गिद्दड़बाहा में कबड्डी रैकेट चला रहा है। गांव भगवानपुर में कबड्डी मुकाबले आयोजित कराए, जिसके लिए ड्रग मनी का इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगे थे।
भवानपुरिया का साथी कंवल सिंह निवासी गांव सुक्खा राजू गुरदासपुर इस समय न्यूजीलैंड में रहता है। उसके माध्यम से ही भगवानपुरिया अपना रैकेट चला रहा है। संदीप नंगल अंबिया जग्गू का कबड्डी लीग को न सिर्फ बुलंदियों पर ले जा रहा था बल्कि मेजर कबड्डी लीग का दबदबा विदेश में बढ़ने लगा था। ऐसी आशंका है कि हत्या का तानाबाना विदेश में बुना गया है। मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण राज्य के डीजीपी से लेकर निचले स्तर के अधिकारी सतर्क हो गए हैं।