चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अब तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नहीं शुरू होने के मामले की सुनवाई कर रहे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के ढुलमुल रवैये पर सख्ती करने का मन बना लिया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर जस्टिस एसएस सारों और गुरमीत राम की बेंच ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई।
साथ ही केंद्रीय नागरिक उड्ययन मंत्रालय के सचिव और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के चेयरमैन को अगली सुनवाई पर कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 30 मई को होगी। बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि अगर अगली सुनवाई के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो यह मामला सीबीआई या सीवीसी को जांच के लिए दे दिया जाएगा।
मंगलवार को सुनवाई के केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित वकीन ने अदालत को बताया कि इंडिगो और एयर इंडिया ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की जानकारी दी है। हालांकि जिन बाकी स्वदेशी एयरलाइंस कंपनियों से इस बारे में पूछा गया था उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है, जिसकी जानकारी कोर्ट को पहले ही दी जा चुकी है।
अंतराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने से किया इंकार स्पाइस जेट और जेट एयरवेज ने चंडीगढ़ से अंतराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने से साफ इंकार कर दिया है। इसके लिए इन दोनों कंपनियों की ओर से कहा गया है कि उनके पास चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के लिए अतिरिक्त विमान फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं।
टाटा के बारे में हाईकोर्ट को बताया गया कि कंपनी चंडीगढ़ एयरपोर्ट से घरेलु उड़ानें शुरू कर चुकी है, लेकिन पूर्व में तय नियमों के कारण वह अगले पांच वर्ष तक चंडीगढ़ से कोई अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू नहीं कर सकती। इस पर जस्टिस एसएस सारों ने कहा कि कोर्ट को साफ-साफ यह बताया जाए कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी या नहीं। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया चेतन मित्तल को कहा कि यह सारी बातें घुमाफिराकर हर सुनवाई पर बताई जा रही हैं। इस तरह कोर्ट को मूर्ख बनाया जा रहा है।
'कोर्ट दो-टूक जवाब चाहता है कि उड़ानें शुरू होंगी या नहीं?'
कोर्ट
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जस्टिस एसएस सारों ने कहा कि कोर्ट दो-टूक जवाब चाहता है कि उड़ानें शुरू होंगी या नहीं? उन्होंने केंद्र सरकार, एएआई और एयरलाइंस कंपनियों को साफ कर दिया कि कोई इस गलतफहमी में न रहे कि हाईकोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करवाने के लिए किसी से आग्रह करेगा। जस्टिस सारों ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में और समय बर्बाद न करे और बता दें कि केंद्र से कुछ नहीं हो सकता। इसके बाद कोर्ट 1400 करोड़ रुपये के इस मामले की जांच सीबीआई या सीवीसी को सौंपी देगा और उन अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करवाया जाएगा जो इसके दोषी हैं।
कोई है जो नहीं चाहता अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट : पंजाब
मंगलवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने कोर्ट से कहा कि इस एयरपोर्ट के निर्माण में पंजाब की बेशकीमती जमीन और करोड़ों रुपये खर्च हो गए हैं। बावजूद इसके इस एयरपोर्ट से आज तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं। उन्होंने अदालत से कहा कि इसके पीछे कोई है जो नहीं चाहता कि चंडीगढ़ से इंटरनेशनल फ्लाइट्स शुरू हों। उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा खेल एयरलाइंस के टाइम स्लॉट्स का है क्योंकि चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने पर इसका सीधा नुकसान किसी दूसरे बड़े हवाई अड्डे को हो सकता है।
इसीलिए चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने में रुकावटें पैदा की जा रही हैं। एजी अशोक अग्रवाल ने कहा कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट से अगर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होती हैं तो इससे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के लोगों को अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट के लिए आईजीआई दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने पूरे मामले की गहराई से जांच किए जाने की जरुरत बताते हुए कहा कि इसके बाद ही सामने आ सकेगा कि वे कौन लोग हैं जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं होने देना चाहते।