फर्जी हस्ताक्षर करना बड़े फर्जीवाड़े का संकेत
उधर, शिक्षा विभाग इस मामले की उच्चस्तरीय जांच बैठाएगा, क्योंकि इस मामले में सेकेंडरी शिक्षा निदेशक तक के फर्जी हस्ताक्षरों का प्रयोग किया गया है। दलालों द्वारा विभाग के सबसे बड़े अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करना बड़े फर्जीवाड़े का संकेत है। विभाग ने इसे काफी गंभीर मामला मानते हुए जल्द जांच शुरू करने का मन बना लिया है। इस जांच में उन स्कूलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की योजना है, ताकि भवन और दस्तावेजों दोनों की जांच हो सके। खुफिया विभाग ने इस प्रकार के स्कूलों और दलालों को लेकर सभी जिलों से फीडबैक मांगा है।
स्कूलों पर भी हो कार्रवाई: अभिभावक मंच
अभिभावक एकता मंच के प्रधान नवीन अग्रवाल का कहना है कि यह बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा है। बिना नियम पूरे किए ही स्कूल खोले और चलाए जा रहे हैं। इसमें बच्चों की जान को खतरा है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। मंच मांग करता है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसमें गिरोह के सदस्यों के साथ साथ स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो इस गड़बड़ी में शामिल हैं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह बहुत गंभीर मामला है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एनओसी और संबंद्धता लेना कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि स्कूल बच्चों की सुरक्षा के जुड़ा मामला है। इस मामले में जो भी शामिल होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - कंवर पाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री।