हरियाणा में उद्योगपतियों की हालत बहुत खराब है। इसका अंदाजा उद्योगपतियों की जुबानी उनकी कहानी सुनकर लगाया जा सकता है। उद्योगपति सीबी गोयल कहते हैं कि संसाधनों के अभाव में विशेषकर पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया के उद्योगपति संकट में हैं।
इंडस्ट्री सेक्टर का सबसे अहम पहिया बिजली से चलता है, लेकिन आसपास के राज्यों की अपेक्षा पंचकूला में इसके दाम सबसे ज्यादा हैं। इंडस्ट्री के लिए सरकार को बिजली के दाम घटाने का जल्द निर्णय लेना चाहिए। वरना यहां के उद्योगपतियों को पलायन या कारोबार बंद करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।
पंचकूला के उद्योगपतियों के लिए मैनपावर सबसे बड़ी समस्या है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार ने अब तक यहां पर इंडस्ट्रियल हाउसिंग स्थापित नहीं किया। यही कारण है कि मैनपावर के लिए उद्योगपतियों को झुग्गी झोपड़ी और गांवों के मजदूरों पर निर्भर होना पड़ता है। इनमें पंजाब से आने वाले लेबर कई कारणों से नाइट शिफ्ट नहीं करते।
- रजनीश गर्ग, उद्योगपति
सरकार ने एमएसएमईडी एक्ट 2006 बनाया था। इसके तहत उद्योगपतियों द्वारा की गई माल की डिलीवरी के 45 दिन के भीतर उसका भुगतान करना तय हो चुका है। इसके बावजूद पेमेंट 45 दिन के भीतर तो दूर कई बार आठ माह तक अटकी रहती है और इनमें अधिकांश सरकारी संस्थाएं ही शामिल होती हैं। पेमेंट के लंबे समय तक लटकने का सीधा असर उद्यमियों की आमदनी पर होता है।
- एएल अग्रवाल, उद्योगपति
मूलभूत सुविधाओं के लिहाज से भी पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया खासा पिछड़ा हुआ है। सूर्य ढलते ही पूरा इलाका अंधकार में डूबा दिखता है। स्ट्रीट लाइट की समस्या पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में है। यहां अक्सर सीवरेज सिस्टम फेल रहता है। प्रशासन को चाहिए कि क्षेत्र के सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए रुटीन सफाई करे।
- सुभाष गुप्ता, उद्योगपति
महंगे मैटीरियल की उपलब्धता पंचकूला के इंडस्ट्री सेक्टर पर शुरू से ही भारी पड़ रही है। यहां के उद्योगपतियों की पुरानी डिमांड स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का डिपो स्थापित करने की चल रही है, लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। स्थानीय उद्योगपतियों को दूर दराज के क्षेत्रों से स्टील की खरीद करनी पड़ती है।
- ओपी चुघ, उद्योगपति
पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया में उद्योगपतियों की समस्याएं क्या हैं? यह सवाल नहीं रहा, अब तो यह प्रश्न उठ रहा है कि उन्हें क्या सुविधा मिल रही हैं। हरियाणा सरकार आज अडाणी ग्रुप से पौने चार से चार रुपये में बिजली खरीदकर उद्योगपतियों को 11 से 12 रुपये में उपलब्ध करा रही है, जबकि गुजरात में उद्योगपतियों को दो से ढाई रुपये यूनिट पर बिजली मुहैया हो रही है। अगर डोर टू डोर सर्वे कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि संसाधनों के अभाव और अन्य कई तरह की समस्याओं के चलते पिछले पांच साल में पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया में कोई नई यूनिट नहीं लगी।
- अशोक जिंदल, उद्योगपति
इंडस्ट्री सेक्टर का पहिया बिजली से ही चलता है, लेकिन आसपास के राज्यों की बजाय पंचकूला में इसके दाम अधिक हैं। ऊपर से टैरिफ बढ़ाकर उद्योगपतियों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। इतना ही नहीं उद्योगपतियों से एडिशनल सिक्योरिटी ली जा रही है। सरकार को इंडस्ट्री के विकास के लिए बिजली के दाम जल्द घटाने का फैसला लेना चाहिए।
- सीबी सचदेवा, उद्यमी
इंडस्ट्री के लोगों को बीजेपी सरकार से काफी उम्मीदें थीं। अपने मैनिफेस्टो में भी सरकार ने उद्योगपतियों के लिए बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन अब सरकार वादाखिलाफी कर रही है। लॉ एंड ऑर्डर से लेकर सड़कों तक का बुरा हाल है।
- दीपक शर्मा, उद्यमी
सुविधाओं के हिसाब से भी पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया काफी पिछड़ा हुआ है। सूरज ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूबा जाता है। स्ट्रीट लाइट की समस्या पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में है। यहां स्ट्रीट लाइट्स तो लगी हैं लेकिन कई दिनों तक नहीं जलती।
- दरबारा सिंह, उद्यमी
पंचकूला में इंडस्ट्री का इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अगर सड़कों के हालात देखे जाएं तो वह गांव से भी बदतर हैं। जलापूर्ति के लिहाज से औद्योगिक घरानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सुबह आठ के बाद शाम में चार बजे वाटर सप्लाई होती है। सरकार और प्रशासन को समझना चाहिए की बिजली-पानी की समस्या का इंडस्ट्री पर क्या असर होता है।
- अमित मेहरा, उद्यमी
मशीनें बंद पड़ी हैं। उद्योगपतियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सर्टिफिकेट पास करने में बड़े स्तर पर धांधली होती है। इसी वजह से इंडस्ट्री भी नहीं चल रही।
- अशोक मनचंदा, उद्यमी
ये हैं प्रमुख मांगें
- प्रोडक्शन कास्ट महंगी
- इंस्पेक्टर राज का खात्मा
- सभी सड़कों का हो निर्माण
- ट्रांसपोर्ट एरिया बनाया जाए
- अनशेड्यूल कट बंद हों
- सस्ता ब्याज मिले, इसके लिए पीएमओ को लिख चुके हैं पत्र