पहले तीन मैच हारने के बाद हमें लगा रहा था हमारा सफर खत्म हो गया है। चौथा मुकाबला करो या मरो वाला था। हमने आयरलैंड के पीसी अटैक और डिफेंस को देखा फिर उनके सेंटर को क्लोज करते हुए उनको बाहर से खेलने के लिए मजबूर किया। हमारी यह रणनीति कामयाब रही। यहीं से टोक्यो ओलंपिक में हमारी जीत का सफर शुरू हुआ।
हॉकी खिलाड़ी शर्मिला ने बताया कि हमारा मनोबल बढ़ता गया तो पदक की उम्मीद भी बढ़ी। ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीम के साथ हम क्वार्टर फाइनल में उतरे। पूरी ताकत के साथ टीम के तौर खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के हर अटैक को रोका। इस मुकाबले को हमने 1-0 से जीत हासिल की। रानी रामपाल, सविता पूनिया का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। इस जीत से हम सभी को आगे बढ़ाने की ताकत मिली।
पहली बार भारतीय महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल के मुकाम तक पहुंची तो सभी को मेडल की उम्मीद हुई लेकिन सेमीफाइनल में अच्छा खेलने के बावजूद किस्मत का साथ न मिलने से हार का सामना करना पड़ा। बाद में कांस्य पदक के लिए ग्रेट ब्रिटेन से मिली हार ने सभी खिलाड़ियों के सपने को तोड़ दिया। टोक्यो से यहां अनुशासन का सबक लेकर आई हूं। अब आगामी ओलंपिक में पदक की उम्मीद है।
उदिता ने कहा कि ओलंपिक जैसी बढ़ी प्रतियोगिता में पहले तीन मैच गंवाने के बाद हौसला टूट चुका था। लगने लगा कि क्या हम क्वार्टर फाइलन खेल पाएंगे या नहीं। पूल के मैच खत्म होने पर हम आगे आने का इंतजार कर रहे थे। ग्रेट ब्रिटेन और अर्जेंटीना में से अर्जेंटीना लूज कर जाता है तो हम आगे रहेंगे। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मैच जीत लिया तो हौसला बढ़ता गया। पहले के मैच में जो कमियां दिखीं उस पर काफी काम किया, जिसकी बदौलत प्रदर्शन सुधार गया।
कांस्य पदक जीतने के लिए पूरी टीम ने जोर लगाया लेकिन किसी दिन किसी का लक होता है। मैच जीतने के बाद ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने कहा था कि आपका गेम शानदार था लेकिन आज हमारा लक अच्छा था। अब हम अपनी कमियां सुधारेंगे, ताकि आगे हम और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
काफी खुशी कि बात है कि पुरुष हॉकी टीम ने इतने लंबे समय बाद पदक जीता है। हमारे पास मेडल तो नहीं है लेकिन देशवासियों का पूरा साथ मिला। मैच हारने के बाद सभी की आंखों में आंसू थे लेकिन खुशी हुई कि उस दिन खेल प्रेमियों ने क्रिकेट का मैच छोड़कर हॉकी का मुकाबला देखा।
हॉकी में लड़कियां आ रहीं आगे और एस्ट्रोटर्फ बनाने की जरूरत
उदिता का कहना है कि अब हॉकी में काफी लड़कियां आगे आ रही हैं। ऐसे में और एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाने और लड़कियों को प्रेरित करने की जरूरत है। अगर खिलाड़ी को जमीनी स्तर पर सुविधा मिलनी शुरू हो जाए तो वह न केवल अच्छा प्रदर्शन करेगा बल्कि पदक भी जीतेगा। प्रदेश में सुविधाओं की बात करें तो कोई कमी नहीं है। इसके लिए मैं हरियाणा सरकार का धन्यवाद करना चाहूंगी।
अब कॉमनवेल्थ, वर्ल्ड कप, एशियाड पर फोकस
शर्मिला ने बताया कि आखिरी हार से हारे नहीं बल्कि हौसला बढ़ा है। अब फोकस कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड कप, एशियाड चैंपियनशिप पर रहेगा। इन प्रतियोगिताओं में मेडल लाना है। उदिता ने कहा कि वह थोड़ा आराम करने के बाद फिर से तैयारी में जुट जाएगी। अगर अभी से तैयारी रखेंगे तो मेडल जरूर लाएंगे। अपने देश के लिए खेलते ही जाना है। कई दशकों बाद भारतीय हॉकी का स्वर्णिम युग आया है। अब इसे जाने नहीं देंगे।