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सर्जिकल स्ट्राइकः ‘हमें घर से बेघर न करो, मोदी जी सुरक्षित छत दे दीजिए'

Mon, 03 Oct 2016 09:46 AM IST
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
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पंजाब में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हाईअलर्ट, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
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सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बढ़े तनाव के चलते कई लोग घरों से बेघर हो गए और अब वे प्रधानमंत्री से सुरक्षित छत देने की बात कर रहे हैं।
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सरहद से एक से डेढ़ किमी दूर बसे करीब बीस सीमांत गांव के लोगों का एक ही दर्द है, उन्हें घर से बेघर न करें। यहां के लोग फिरोजपुर के डीसी डीपीएस खरबंदा से खासे नाराज हैं। फसल और पशुधन छोड़कर वह जाने को तैयार नहीं हैं।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरहद से दूर शहर में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर उन्हें मकान बनाने की इजाजत दें ताकि सरहद पर तनाव पैदा होने पर वह घर से बेघर न हों। सरहद से एक किमी दूर स्थित सीमांत गांव झुगगे हजारा सिंह वाला समय सुबह 9.10 बजे।
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चौपाल पर महिला, पुरुष और बच्चे हाथ में बर्तन लेकर लंगर का इंतजार कर रहे थे। लोग गुस्से में थे। महल सिंह, महिंदर सिंह, मलकीत सिंह, प्रकाश सिंह और राम सिंह ने बताया कि मोदी ने सरहद पर तनाव को लेकर प्रत्येक सरहदी जिले को एक करोड़ रुपये दिए हैं। यह पैसे ग्रामीणों के खाते में डाले जो खाते बैंकों में खुलवाएं हैं।

जिला प्रशासन की तरफ से नहीं कोई इंतजाम

पंजाब में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हाईअलर्ट, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं
जिला प्रशासन का कोई अधिकारी उन्हें खाने को लंगर व अन्य सुविधा नहीं दे रहा है। सरहद पर तनाव होने पर बहुत से लोग घर छोड़कर रिश्तेदारों के पास चले गए हैं। राहत कैंपों में कोई सुविधा नहीं है। पशुओं की देखरेख के लिए प्रत्येक घर में एक-दो पुरुष रुके हैं।

जिला प्रशासन की तरफ से चार दिन से लंगर नहीं पहुंचा। सिर्फ दो बार भाजपा किसान मोर्चा के प्रधान सुखपाल सिंह नन्नु ने लंगर दिया है। बाकी राजनीतिक नेता आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। सरहद से सटे गांव गट्टी राजोके में सुबह 10.19 बजे ग्रामीण गुरुद्वारे में लंगर का इंतजार कर रहे थे। सरपंच मक्खन सिंह, साबका सरपंच सुखविंदर सिंह, बलवीर सिंह ने कहा कि उनकी नाराजगी डीसी से है।

डीसी ने उन्हें प्रत्येक सुविधा से वंचित रखा है। लोगों के पास अपने रिश्तेदारों के यहां जाने के लिए पैसे तक नहीं हैं। घर पर ताला लगाकर जाते हैं चोरी का भय है। पशुओं को चारा भी नहीं मिल रहा है। फसल को पकने में दस दिन रह गए हैं। सीमा से सटे गांव टिंडी वाला में सुबह 10.45 बजे लोग गुरुद्वारे में इकट्ठा थे क्योंकि प्रत्येक राजनीतिक पार्टी के नेता उनके पास पहुंचने वाले थे।
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खाने-पीने और जीने के लिए काफी परेशानी हो रही

सर्जिकल स्ट्राइक के चलते हाईअलर्ट के बाद सुरक्षित ठिकानों की ओर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण अजीत सिंह व बलबीर सिंह ने बताया कि रात के समय गांव में सिर्फ डेढ़ सौ पुरुष रह जाते हैं। बच्चे व महिलाएं शहर में रिश्तेदारों के पास चली जाती हैं। सुबह गांव में आकर खेतों में कामकाज और भोजन बनाती हैं और रात होने पर यहां से फिर शहर चले जाते हैं। बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है।

जिला प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही है। सीमांत गांव चांदी वाला के लोगों का कहना है कि गांव के स्कूल व गुरुद्वारे में पुलिस मुलाजिम तैनात कर दिए गए हैं। उन्हें चाय-पानी और रोटी गांव के लोगों को ही देनी पड़ती है जबकि यह कार्य जिला प्रशासन का है।

महिला कौशल्या देवी का कहना है कि शहर से सुबह गांव आकर परिवार के लिए रोटी बनाती हूं  साथ में मुलाजिमों को भी रोटी देनी पड़ती है। यही समस्या गांव कमाले वाला, भाने वाला, भंबा हाजी, अवेला हाजी, निहाला किलचा, गंधू किलचा के लोगों की है।
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