कारगिल का युद्ध 55 दिन तक चला और यह युद्ध 160 किलोमीटर के क्षेत्र में लड़ा गया था। यह कहना था कर्नल योगेंद्र सिंह का। वे गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में कारगिल के शहीद हुए परिजनों के सम्मान समारोह में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रहे थे। यह समारोह विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर सिंह सभागार में हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी और जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र हरियाणा सर्कल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया।
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उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में टोलोलिंग, टाइगर हिल्स और मुसको क्षेत्र में हुई तीन मुख्य लड़ाइयों में हरियाणा के सैनिकों का अधिकतम योगदान था। सेना ने इसे ऑपरेशन विजय का नाम दिया था। हरियाणा के सैनिकों को इस युद्ध में एक महावीर चक्र, पांच परमवीर चक्र और 14 सेना मेडल हासिल हुए थे। वहीं इस युद्ध में सक्रिय रूप से भाग ले चुके वायुसेना के कैप्टन भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा था।
1999 में उन्होंने अत्यंत कुटिलता के तहत कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ योजना बनाई थी। जिस क्षेत्र में घुसपैठ हुई थी, वह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां से भारत को लेह सहित कई महत्वपूर्ण इलाकों से काटा जा सकता था। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि कारगिल युद्ध भारत के वीर जवानों की गौरवगाथा का भी प्रत्यक्ष परिणाम है। कुल 527 शहीदों में से 74 सैनिक हरियाणा के थे। केवल दो प्रतिशत जनसंख्या वाले प्रदेश की देश की सेना में 12 प्रतिशत सैनिकों की भागीदारी है।
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हरियाणा इतिहास एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष प्रो. रघुवेंद्र तंवर ने कहा कि इस युद्ध ने भारतीय सेना के शौर्य को दुनिया में पहचान दी।
युद्ध से संबंधित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई
इस दौरान युद्ध से संबंधित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। लाहौरिया पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। इस दौरान सेना की हथियारों की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से भी एक प्रदर्शनी लगाई गई।
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र से आशुतोष भटनागर, स्टेट वेयर हाउस कार्पोरेशन के चेयरमैन श्रीनिवास गोयल, अध्ययन केंद्र के महासचिव डॉ. विवेक बाल्यान, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सहायक निदेशक डॉ. जगदीश, डॉ. नरेंद्र, कृष्ण गोयल, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल पुंडीर आदि मौजूद रहे।
जिला------शहीदों के नाम
अंबाला : मनजीत सिंह
कुरुक्षेत्र : संजीव कुमार
करनाल : गुलाब सिंह, प्रवेश कुमार
पानीपत : अमरदीप सिंह, बिजय सिंह
सोनीपत : रविंद्र सिंह, सुखबीर सिंह, सतबीर सिंह मोर
रोहतक : जसवीर सिंह, राजबीर सिंह, सुरेश कुमार, विजय सिंह, जसबीर सिंह, कुलदीप सिंह व रणधीर सिंह
झज्जर : जयप्रकाश, सुरेंद्र सिंह, लीलाराम, रामफल, राजेश कुमार, धर्मबीर सिंह, हरिओम
भिवानी : संजय सिंह, राजवीर सिंह, धर्मबीर सिंह सिहाग, सुरेश कुमार
हिसार : महाबीर सिंह
सिरसा : कृष्ण कुमार
फतेहाबाद : नरेंद्र सिंह जाखड़, मनोहर लाल व सतपाल सिंह
जींद : आशीष कुमार
नूंह : अहमद अली, बिजेंद्र कुमार
गुरुग्राम : कैलाश सिंह
फरीदाबाद : जाकीर हुसैन
महेंद्रगढ़ : बिरेंद्र सिंह, लाल सिंह व अशोक कुमार यादव
यमुनानगर : नवीन कुमार