रूस से सुखोई लड़ाकू विमानों की खरीद के करीब 23 साल बाद अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का बेड़ा वायुसेना को मिला है। इन विमानों के वायुसेना में शामिल होने से चीन और पाकिस्तान पर भारत को हवाई युद्धक क्षमता में बढ़त हासिल होगी। निर्विवाद ट्रैक रिकॉर्ड वाले राफेल विमानों को सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है।
एनडीए सरकार ने 23 सितंबर, 2016 में फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन के साथ 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59 हजार करोड़ का करार किया था। यह सौदा वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था।
अगस्त में औपचारिक तौर पर होगा शामिल
हालांकि बुधवार को पांच राफेल विमानों को वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया है लेकिन औपचारिक समारोह अगस्त में होगा। इस कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत वायुसेना के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे।
‘राष्ट्र रक्षा के समान कोई पुण्य नहीं है, राष्ट्र रक्षा के समान न कोई व्रत है, न कोई यज्ञ है। आकाश को स्पर्श करने वाले स्वागत है।’ नरेंद्र मोदी, पीएम
‘अंबाला में पक्षियों की सुरक्षित लैंडिंग। वायुसेना की नई क्षमता के बारे में अगर किसी को चिंता करने की जरूरत है तो उन्हें करनी चाहिए जो हमारी क्षेत्रीय संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करना चाहते हैं।’- राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री
मौसम में उतार चढ़ाव के साथ बढ़ती रहीं धड़कने
राफेल की सफल लैंडिंग से पहले मौसम की आंख मिचौली से वायुसेना के अधिकारियों की धड़कने बढ़ती रहीं। सुबह साढ़े नौ बजे मौसम ने करवट लेना शुरू किया और देखते ही देखते आकाश में काली घटाएं छा गईं। हालांकि वायुसेना ने मौसम खराब होने की स्थिति में प्लान बी तैयार कर रखा था, लेकिन उसकी जरूरत नहीं पड़ी। दरअसल, अंबाला में मौसम खराब होने की स्थिति में जोधपुर एयरबेस को स्टैंडबाई पर रखा गया था। अगर अंबाला में बारिश होती तो राफेल को जोधपुर में लैंड कराया जाता।
एयरफोर्स चीफ भदौरिया दिखे खासे उत्साहित
देशवासियों में ही नहीं बल्कि वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों को राफेल का बेसब्री से इंतजार था। दोपहर करीब 12 बजे वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया व एओसी-इन-सी वेस्टर्न एयर कमांड बी सुरेश समेत एयरफोर्स के आला अधिकारी दिल्ली से विशेष विमान से अंबाला पहुंच गए थे। वायुसेना प्रमुख समेत शीर्ष अधिकारियों ने राफेल लाने वाले सातों जांबाज पायलटों का गर्मजोशी से हौसलाअफजाई की। राफेल लाने वाले तीन पायलट यूपी के बलिया, मैनपुरी और हरदोई के हैं जबकि एक कश्मीर के हैं।
इसलिए अंबाला में की गई तैनाती
राफेल की स्क्वाड्रन पहले राजस्थान के जोधपुर एयरपोर्ट स्टेशन को दी जानी थी। यह एयरफोर्स स्टेशन भी वेस्टर्न एयर कमांड के अधीनस्थ आता है। लेकिन अब सीमा पर चीन और पाकिस्तान के साथ तनातनी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। इसलिए इन विमानों को अंबाला में तैनात किया गया है। अंबाला से एलओसी और एलएसी पर राफेल विमान जल्दी पहुंच सकते हैं। दूसरा, अंबाला एयरफोर्स स्टेशन दिल्ली से महज 200 किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिए रणनीतिक दृष्टिकोण से भी यह अहम एयरबेस है।
पांच लड़ाकू विमान करीब 48 घंटे बाद अंबाला पहुंच गए। सवाल यह है कि आखिर 1389 प्रति घंटे की स्पीड से उड़ने वाले राफेल को मात्र सात हजार किलोमीटर की दूरी तय करने में दो दिन कैसे लग गए। दरअसल राफेल सुपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरते हैं, लेकिन उनमें ईंधन कम होता है। इसीलिए वे ज्यादा दूरी तय नहीं कर पाते। यही कारण है कि इनमें बार-बार ईंधन डालना पड़ता है, इसीलिए 48 घंटे का समय भी लगा।
गोल्डन-ऐरोज स्कॉवर्डन हुई जिंदा
अंबाला में ही राफेल फाइटर जेट्स की पहली स्कॉवर्डन में तैनात होगी। 17वीं नंबर की इस स्कॉवार्डन को गोल्डन-ऐरोज नाम दिया गया है। इस स्कॉवड्रन में 18 रफेल लड़ाकू विमान होंगे। तीन ट्रैनर और बाकी 15 फाइटर जेट्स। दरअसल, गोल्डन एरो अभी तक भठिंडा स्थित मिग-21 की स्कॉवार्डन को जाना जाता था। मिग-21 की गोल्डन एरो स्कॉवड्रन ने करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। मिग-21 के रिटायर होने के बाद ये स्कॉवार्डन पिछले कुछ सालों से बंद पड़ी थी। अब इसे एक बार फिर से राफेल के साथ जीवित कर दिया गया है। पूर्व वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ भी इसी स्कॉवार्डन से ताल्लुक रखते थे।
राफेल का बुधवार को सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। दूसरी ओर एक ऐसा भी व्यक्ति था जिसका राफेल की तरह ही इंतजार हो रहा था। पूरा अंबाला एयरफोर्स स्टेशन अपने सभी पायलट के साथ उस शख्स के लिए पलकें बिछाए हुए थे जिसकी अगुवाई में राफेल को लैंडिंग करनी थी। उस शख्स का नाम है 17 गोल्डन एरो स्क्वाड्रन के कमांडिंग आफिसर ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह।
शौर्य और कीर्ति चक्र से सम्मानित हरकीरत सिंह की पत्नी विंग कमांडर हैं और ग्राउंड क्रू मेंबर्स का हिस्सा हैं। हरकीरत सिंह के पिता निर्मल सिंह लेफ्टिनेंट कर्नल रहे हैं। बता दें कि हरकीरत सिंह ने 12 साल पहले मिग-21 की सुरक्षित लैंडिंग कराई थी। उड़ान भरने के बाद इस मिग-21 का इंजन बंद हो गया और कॉकपिट में अंधेरा छा गया था।
उन्होंने इमरजेंसी लाइट जलाकर आग पर काबू पाया। फिर मिग-21 का इंजन दोबारा स्टार्ट किया। इंजन चालू करके ग्राउंड कंट्रोल की मदद से नेविगेशन सिस्टम के जरिये रात में लैंडिंग कराई थी। उस समय हरकीरत सिंह स्क्वाड्रन लीडर थे।