पांच लड़ाकू विमान करीब 48 घंटे बाद अंबाला पहुंच गए। सवाल यह है कि आखिर 1389 प्रति घंटे की स्पीड से उड़ने वाले राफेल को मात्र सात हजार किलोमीटर की दूरी तय करने में दो दिन कैसे लग गए। दरअसल, राफेल सुपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरते हैं लेकिन उनमें ईंधन कम होता है। इसीलिए वे ज्यादा दूरी तय नहीं कर पाते। यही कारण है कि इनमें बार-बार ईंधन डालना पड़ता है, इसीलिए 48 घंटे का समय भी लगा।
गोल्डन ऐरो स्क्वाड्रन हुई जिंदा
अंबाला में ही राफेल की पहली स्क्वाड्रन तैनात होगी। 17वीं स्क्वाड्रन को गोल्डन-ऐरो नाम दिया गया है। इस स्क्वाड्रन में 18 राफेल लड़ाकू विमान होंगे। तीन ट्रेनर और बाकी 15 फाइटर जेट्स। दरअसल, गोल्डन एरो अभी तक बठिंडा स्थित मिग-21 की स्क्वाड्रन को जाना जाता था। मिग-21 की स्क्वाड्रन ने करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। मिग-21 के रिटायर होने के बाद ये स्क्वाड्रन पिछले कुछ सालों से बंद थी। अब इसे एक बार फिर से राफेल के साथ जीवित कर दिया गया है। पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ भी इसी स्क्वाड्रन से ताल्लुक रखते थे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला व गृह मंत्री अनिल विज ने हरियाणा की पावन धरती पर राफेल लड़ाकू विमानों के पहले जत्थे का स्वागत किया है। इन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण व अत्याधुनिक हथियारों से उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राफेल की खरीद इस बात का प्रमाण है।
सुरजेवाला का स्वागत के साथ तंज
रणदीप सुरजेवाला ने रॉफेल का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि वायुसेना के जाबांज लड़ाकुओं को बधाई। यह जरूर पूछते है कि 526 करोड़ रुपये का एक राफेल अब 1670 करोड़ रुपये में क्यों? 126 राफेल की बजाय 36 ही क्यों? मेक इन इंडिया की बजाय मेक इन फ्रांस क्यों? 5 साल की देरी क्यों?