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देखिए! ये नौजवान देश के लिए खेलते हैं...पर खुद लगानी पड़ती झाड़ू, खाने के भी पड़े हैं लाले

Thu, 06 Dec 2018 01:57 PM IST
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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देश के दिव्यांग खिलाड़ी
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एक तरफ नेशनल टीम के खिलाड़ी शोहरत और अमीरी के शिखर पर नजर आते हैं। वहीं देश के लिए खेलने वाले इन खिलाड़ियों को खाना तक नहीं मिलता। भारतीय क्रिकेट टीम के कई चेहरे टीवी विज्ञापन से लेकर बड़े-बड़े अवार्ड फंक्शन में दिखाई पड़ते होंगे। इनकी लग्जरी लाइफ देखकर क्रिकेट के खेल में पैसे और रुतबे का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
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लेकिन इन खिलाड़ियों को दिव्यांगता के बावजूद अपने कमरे में झाड़ू-पोछा खुद करना पड़ता है। तमाम विपरीत परिस्थितियों और बिना जरूरी सुविधाओं के यह खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर देश के लिए ट्राफी जीतने की खातिर जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं चंडीगढ़ के चेशायर होम में रहने वाले व्हीलचेयर क्रिकेटरों की।

जो शाररिरिक रूप से अक्षम जरूर हैं लेकिन उनमें सामान्य क्रिकेट खिलाड़ियों की तरह ही अपने देश के लिए जीत हासिल करने का जुनून कूट-कूट का भरा हुआ है। इन खिलाड़ियों में भारतीय व्हीलचेयर टीम और पंजाब टीम के कप्तान तक मौजूद है। यह खिलाड़ी सरकार और मंत्रियों से इस बात की आस लगाए बैठे हैं कि उन्हें भी जरूरी सुविधाएं मिलें ताकि वह भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
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चेशायर होम में दिव्यांग क्रिकेटर खुद लगाते हैं झाड़ू-पोछा

सेक्टर 21 ए, के मकान नंबर- 341 में चेशायर होम बना हुआ है। यहां पर 10 से अधिक  दिव्यांग क्रिकेटर और तीन अनाथ बच्चे रहते हैं। इनमें भारतीय  व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रोहित ने बताया कि पहले यह मकान एक एनजीओ के हवाले था, जिसका चेयरमैन गुरदीप सिंह हम लोगों से यहां पर रहने के  पैसे मांगता था। हमने जब इस बात की शिकायत डीसी से की तो वह यहां से गायब हो गया।

इसके बाद चेशायर होम को रेडक्रास सोसाइटी के अंडर में दे दिया गया। अब यह होम सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के हवाले कर दिया गया है। रोहित ने कहा कि पहले हमसे कहा गया कि यहां पर एक सफाई कर्मचारी, खाना बनाने वाला कुक, माली आदि ड्यूटी लगाई जाएगी लेकिन यह बातें सिर्फ हवा-हवाई ही साबित हुईं। यहां पर रहने वाले दिव्यांग खिलाड़ी जैसे-तैसे व्हीलचेयर पर बैठकर ही साफ-सफाई के साथ खुद ही झाड़ू-पोछा लगाने के लिए मजबूर हैं।

हम खुद ही कूड़ा उठाकर डस्टबिन में फेंकने जाते हैं। कोई भी हमारी बेबसी को देखने वाला नहीं।

समय पर खाना भी नहीं मिलता
पोलियो से पांव से लाचार विक्रम पंजाब व्हीलचेयर टीम के लिए क्रिकेट खेलते हैं। उन्होंने बताया कि हमें यहां पर समय से खाना तक नहीं मिलता। यहां पर रहने वाले अधिकतर दिव्यांग युवक पेशे से व्हीलचेयर क्रिकेट ही खेलते हैं। इसके अलावा यहां पर एक दो बच्चे प्राइवेट काम भी करते हैं। उनसे ही थोड़े पैसे लेकर राशन खरीदते हैं। इतने कम राशन में हम भर पेट भर खाना तक नहीं खा सकते। हम केवल एक समय का खाना खाने के लिए मजबूर हैं। हमारी हालत किसी से छुपी नहीं है। न तो प्रशासन देखभाल के आगे आता है और नही सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट। जब कभी ऊपर से प्रेशर आता है तो शक्ल दिखाकर और वादे करके चले जाते हैं।
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अभ्यास के लिए जगह तक नहीं उपलब्ध

भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे व्हीलचेयर क्रिकेटर वीर सिंह संधू ने बताया कि हमारे अंदर हिम्मत और जज्बे की कोई कमी नहीं। भारत को कई इंटरनेशनल मैचों में जीत दिला चुके वीर सिंह को इस बात का मलाल जरूर है कि उनकी टीम को चंडीगढ़ में अभ्यास के लिए प्रशासन की ओर से एक जगह तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।

वीर सिंह ने बताया वह यूटी स्पोर्ट्स विभाग से कई बार अनुरोध कर चुके है कि उन्हें सेक्टर-16 के क्रिकेट स्टेडियम में अभ्यास के लिए कुछ जगह उपलब्ध करवा दी जाए लेकिन आज तक उनकी सुनी नहीं गई। अब हारकर खुद सेक्टर-21 में सैर करने वाले पार्क और चेशायर होम में खुद नेट लगाकर अभ्यास कर रह खुद नेट्स लगाकर अभ्यास कर रहे हैं।

चेशायर होम में रसोइए का इंतजाम किया जाना चाहिए, जिससे कम से कम समय पर खाना तो मिल जाए और हम लोग समय से अपना अभ्यास कर सकें । साथ ही सफाई करने वाले को भी नियुक्त किया जाए।

सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट केवल चेशायर होम के बिजली पानी के बिल का अदा करता है। इसके अलावा चेशायर होम से हमारा कोई लेनादेना नहीं है।
- डीआर नेगी, नोडल ऑफिसर, सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट
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