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सत्ता के दुरुपयोग से बचाती है स्वतंत्र पत्रकारिता : प्रो. अर्चना

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चंडीगढ़। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग चंडीगढ़ प्रशासन, चंडीगढ़ चैप्टर ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी और इंडियन नेशनल यंग एकेडमी ऑफ साइंसेज की ओर से आयोजित की जा रही व्याख्यान सीरीज की अगली कड़ी में शनिवार को नोबेल के शांति पुरस्कार पर व्याख्यान हुआ। यह पुरस्कार संयुक्त रूप से मारिया रेसा और दिमित्री मुराटोव को मिला था, क्योंकि उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी को लोकतंत्र और स्थायी शांति के लिए जरूरी माना। इस पर पीयू की प्रो. अर्चना आर सिंह ने कहा कि सत्ता के दुरुपयोग से स्वतंत्र एवं तथ्य आधारित पत्रकारिता बचाती है।
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व्याख्यान में सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन इंडिया (एसपीएसटीआई) पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज का भी सहयोग रहा। प्रो. अर्चना आर सिंह ने कहा कि हमने पत्रकारिता की शुरुआत ऐसे समय में की, जब देश एजेंडा और विचारधारा से प्रेरित था और हमारा दृष्टिकोण आक्रामक था, क्योंकि सभी राष्ट्रवादी नेता सरकार में थे, इसलिए प्रेस रचनात्मक विपक्ष के रूप में उभरकर कार्य करने के लिए सामने आई। उन्होंने कहा कि जिस तरह जंक फूड हमारे आहार में स्वस्थ भोजन की जगह लेता है, उसी तरह जंक जर्नलिज्म कुछ महत्वपूर्ण चीजों को हटा देता है जो केवल दिलचस्प हैं, महत्वपूर्ण नहीं हैं।
सामग्री निर्माता व उपयोगकर्ता के बीच की रेखा धुंधली हुई
सोशल मीडिया पर भी उन्होंने विचार रखे। कहा कि सामग्री निर्माता और उपयोगकर्ता के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। सोशल मीडिया जागरूकता पैदा करने के लिए अच्छा है, लेकिन वास्तविक राजनीतिक परिवर्तन के लिए ठीक नहीं। इसे समझने के लिए समय चाहिए। महासचिव प्रो. कीया धर्मवीर, पीयू के पूर्व वीसी एवं एसपीएसटीआई के उपाध्यक्ष प्रो. अरुण के. ग्रोवर, डॉ. महक शर्मा, लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह, डॉ. निशिमा वांगू आदि ने भी विचार रखे।
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