हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी। भाजपा का विजय रथ पहले की तरह ही आगे बढ़ा। जबकि 19 जून को जब मतदान हुआ था, उस समय प्रदेश में अग्निपथ के विरोध की आग प्रबल थी।
पंजाब में प्रचंड से बहुमत सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी हरियाणा के निकाय चुनाव में बड़े उलटफेर की आस लगाए बैठे थी, जो नहीं हो पाया। आप को अभी धरातल पर और काम करने के साथ ही शहरी मतदाताओं का विश्वास जीतना होगा। पंजाब और हरियाणा की सियासत में दिन-रात का अंतर है, इसलिए पंजाब और दिल्ली की तरह यहां राजनीतिक सफलता हासिल करना आसान नहीं है।
इनेलो के लिए भी ये नतीजे सुखद नहीं कहे जा सकते। उसे भी आगामी चुनावों के लिए बिसात नए सिरे से बिछानी होगी। परंपरागत तरीके की राजनीति से शहरों में जीत मिलने वाली नहीं है। उसे शहरों में पैठ बढ़ानी पड़ेगी।
दिसंबर 2018 में भाजपा ने पानीपत, यमुनानगर, करनाल, हिसार और रोहतक नगर निगम चुनाव जीतकर मेयर पद पर अपना कब्जा जमाया। भाजपा उ मीदवार भारी मतों से विजयी हुए थे। सरकार ने इसे भाजपा सरकार की नीतियों की जीत बताया था। पानीपत नगर निगम की मेयर अवनीत कौर रिकॉर्ड 74940 मतों से जीती थी। इसके बाद भाजपा ने दिसंबर 2020 में पंचकूला नगर निगम में जीत दर्ज की। सोनीपत में कांग्रेस जीती, जबकि अंबाला शहर में पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी ने जीत दर्ज की थी। विनोद शर्मा अब भाजपा के समर्थन में ही हैं।