हरियाणा में 5500 पुरुष सिपाही पदों की भर्ती के लिए शारीरिक मेजरमेंट (नापतौल) करने वाली एजेंसी और उसकी मशीनें सवालों के कटघरे में आ गई हैं। गंभीर बात यह है कि जिन युवाओं को हाइट कम बताकर भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जब वे सिविल अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के पास पहुंचे तो वहां पर उनकी हाइट पूरी पाई गई। इसी तथ्य के आधार पर इन युवाओं ने पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। युवाओं की मांग है कि उनकी नापतौल मशीन के बजाय पीजीआई चंडीगढ़ या फिर अन्य सरकारी अस्पतालों के बोर्ड द्वारा कराई जाए।
अभ्यर्थी सुमित मोर ने एसआई के लिए भी फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट दिया था। उस समय मशीन ने उसकी हाइट 170.2 सेंटीमीटर बताई है, जबकि सिपाही भर्ती में 169.1 बताकर उसे बाहर कर दिया। इसी प्रकार, विकास हुड्डा सेना में नौकरी करके आया है। सेना में उसकी हाइट 170 सेंटीमीटर आंकी गई है, जबकि सिपाही भर्ती में 166.9 सेंटीमीटर बताकर उसे बाहर कर दिया। महिला सिपाही, दुर्गा शक्ति समेत कमांडो के भी कई युवाओं के साथ ऐसा ही हुआ है। सभी एकजुट होकर अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
एक्सपर्ट बताते हैं कि मशीन में भी गड़बड़ी हो सकती है। लेकिन अधिकतर हाइट मापने के लिए खड़े संबंधित व्यक्ति पर निर्भर करता है। अगर व्यक्ति सीधा और चुस्त खड़ा होगा तो ऊंचाई अधिक आएगी, अगर शरीर ढीला और सिर नीचे किया होगा तो एक से दो इंच का अंतर आ जाता है।
जिन युवाओं को आयोग की एजेंसी ने हाइट कम बताकर बाहर कर दिया, जब वे संबंधित जिलों के सिविल अस्पताल में पहुंचे और बोर्ड से अपना चैकअप कराया तो हाइट पूरी मिली। एजेंसी और मशीनों दोनों की जांच होनी चाहिए। -रविंद्र ढुल, एडवोकेट, पंजाब एवं हरियाणा।
हाइट को लेकर आयोग के पास शिकायतें पहुंचीं हैं। आयोग इन पर विचार कर रहा है। किसी भी अभ्यर्थी के साथ गलत नहीं होने दिया है। हाइट के सबूत देने वालों के मामलों की जांच कराई जाएगी। मशीनों में किसी प्रकार की गड़बड़ नहीं है। -भोपाल सिंह खदरी, चेयरमैन, एचएसएससी।