अरावली और शिवालिक क्षेत्र में अवैध खनन, अतिक्रमण वन विभाग के अफसरों की चूक का नतीजा है। दोनों पहाड़ी क्षेत्रों की वन भूमि गैर वन कार्यों के लिए उपयोग में लाई जा रही है। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) ने विधानसभा में प्रस्तुत वित्त वर्ष 2018-19 की अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है।
कैग ने वन विभाग की प्रभावशीलता का आंकलन करने के लिए जुलाई 2018 से अप्रैल 2019 के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, अरावली और शिवालिक क्षेत्र में स्थित 10 वन मंडलीय कार्यालयों में से मंडल वन अधिकारी प्रादेशिक नूंह, यमुनानगर, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, अंबाला, रेवाड़ी, पिंजौर व फरीदाबाद के दस्तावेजों की जांच कर यह रिपोर्ट तैयार की है।
पिंजौर को छोड़कर सात वन मंडलीय कार्यालयों के अधीन 1125 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण का शिकार थी। इनमें से केवल 25 हेक्टेयर ही कब्जे से छुड़वाई गई। मंडलीय अभिलेखों और भौगोलिक सूचना प्रणाली सर्वेक्षण के अनुसार वन भूमि पर अतिक्रमण के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर पाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वन विभाग का निगरानी व नियंत्रण तंत्र लचर है। दोषियों पर कार्रवाई में देरी और सुरक्षा चौकीदारों की तैनाती पारदर्शी तरीकेसे न होने के कारण सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। कैग ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर अपनी रिपोर्ट नवंबर 2019 में सरकार के पास कार्रवाई के लिए भेज दी थी, लेकिन सितंबर 2020 तक जवाब ही नहीं आया।
जुर्माना न वसूलने पर करोड़ों का नुकसान
पेड़ों के अवैध कटान, अवैध खनन और अतिक्रमण के 46 मामलों में 2.18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के दो माह के भीतर पर्यावरण न्यायालयों में दायर नहीं किया गया। मंडल वन अधिकारी फरीदाबाद से प्राप्त अभिलेखों की जांच में कैग ने यह पाया है। मंडल वन अधिकारी ने वन संरक्षक दक्षिण परिमंडल, गुरुग्राम को जून 2018 में तत्कालीन वन रेंज अधिकारी फरीदाबाद के विरुद्घ कार्रवाई की सिफारिश की थी। चूंकि, वह पर्यावरण न्यायालयों में मामले दायर करने में विफल रहे। 2015-19 के दौरान ऐसे ही 176 मामले गुरुग्राम, नूंह, यमुनानगर व अंबाला मंडल में भी सामने आए। इन कुल 222 मामलों में समय के अंदर जुर्माना वसूली न होने पर सरकार को 2.74 करोड़ की वित्तीय हानि हुई।
सुरक्षा चौकीदारों की नियुक्ति का रिकॉर्ड ही नहीं
अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन को रोकने के लिए खनन संभावित क्षेत्र में सुरक्षा चौकीदारों की तैनाती संदेह के दायरे में है। 2015-18 के दौरान फरीदाबाद, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह और रेवाड़ी मंडल कार्यालय में सुरक्षा चौकीदारों के वेतन पर खर्च 2.90 करोड़ रुपये में भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इन चौकीदारों को नियुक्त करने संबंधी दस्तावेज मंडल कार्यालय कैग को उपलब्ध नहीं करा पाए। चौकीदार लगे व्यक्तियों का डाटा और कर्मचारी राज्य बीमा, भविष्य निधि योगदान का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे कैग यह प्रमाणित करने में विफल रहा कि चौकीदार वास्तव में कार्यरत थे भी या नहीं। इनकी तैनाती करने के बावजूद अवैध खनन नहीं रुका। चूंकि, भौतिक सत्यापन में कैग ने अवैध खनन के मामले पकड़े।
कैग का निष्कर्ष
अरावली और शिवालिक क्षेत्र में वन आच्छादन के अंतर्गत नाजुक पारिस्थितिकी को अतिक्रमण एवं अवैध गतिविधियों के कारण लगातार नुकसान पहुंचा। सरकार अवैध खनन रोकने और अपराधियों पर शिकंजा कसने में अप्रभावी रही। वनों की निगरानी और रखवाली पर किए गए खर्च के वांछित परिणाम नहीं मिले।
कैग की सरकार को सिफारिशें
- भौगोलिक सूचना प्रणाली सर्वेक्षण के आंकड़ों के जरिए अतिक्रमण का जमीनी सत्यापन कराकर भूमि को कब्जा मुक्त कराएं।
- वन क्षेत्र में अतिक्रमण और अन्य अवैध गतिविधियां खत्म करने के लिए रक्षा एवं निगरानी तंत्र को मजबूत करें।
- प्रतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि पर कब्जा प्राप्त करने के लिए उचित प्रणाली विकसित करें।
- वनों की सुरक्षा करने में विफल विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय कर वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के प्रावधानों अनुसार अभियोजन कार्यवाही शुरू की जाए