हरियाणा में अवैध कालोनी काटने वाले कालोनाइजरों के हौसले आज भी बुलंद हैं। वैसे तो जब से हरियाणा बना है, ये खेल बदस्तूर जारी है। मगर करीब ढाई दशक के दौरान इन अवैध कालोनियों का गोरखधंधा इस कदर फैला कि कृषि योग्य भूमि के साथ-साथ नदियों तक की जमीन भी आज अवैध कालोनियों में तबदील हो चुकी हैं। कालोनाइजर बिना सरकार की अनुमति ये कालोनियां काटते हैं और फिर प्लॉटिंग कर लोगों को बेच देते हैं। पहले तो इन अवैध कालोनियों में इन प्लाटों की रजिस्ट्री भी हो जाती थी।
मगर यहां प्लाट खरीदने वाले लोग उस वक्त ठगा महसूस करते थे, जब संबंधित स्थानीय निकायों द्वारा इन अवैध कालोनियों में विकास कार्य करवाने से साफ इंकार कर दिया जाता था। आज भी सैंकड़ों अवैध कालोनियों के लोग अपनी बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित है। दूसरा, इन कालोनियों को काटने से पहले सरकार की अनुमति न लेने की वजह से सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान पहुंचा है। हालांकि सरकारों ने हारकर 50 फीसद से अधिक विकसित कई अवैध कालोनियों को रेगुलर भी किया है, ताकि वहां रहने वाले लोगों को सुविधाएं मिल सकें।
फिर भी इन अवैध कालोनियों का गोरखधंधा आज भी जारीहै। जनवरी 2014 से लेकर जनवरी 2020 तक देखें तो प्रदेश में इन छह सालों में 2642.12 एकड़ जमीन पर 970 अवैध कालोनियां और काटी जा चुकी हैं। कुरुक्षेत्र में 100 तो रेवाड़ी, अंबाला, रोहतक, फरीदाबाद में 60 से ज्यादा कालोनियां काटी गई है। सरकार की ओर से इस दौरान अवैध कालोनी काटने पर 967 को नोटिस जारी किया गया है। जबकि 428 के खिलाफ केस भी दर्ज करवाया गया है।
बड़ी हैरत की बात यह कि कनीना, रोहतक, सांपला, महम, नारायणगढ़, बराड़ा, रादौर, हांसी, रानियां व चरखीदादरी में इस संदर्भ में एक भी केस दर्ज नहीं किया गया। जबकि अन्य सभी शहरों में मुकद्दमे दर्ज हुए हैं। उधर, 718 कालोनियों में तोड़फोड़ भी की गई है। मगर बहुत से कालोनियों में स्थिति यह है कि तोड़फोड़ के बावजूद यहां अवैध निर्माण जारी है।
बेखौफ कालोनाइजर काटते गए कालोनियां
आंकड़े देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न जिलों में नगर निकायों की सीमा के अंतर्गत अवैध कालोनी काटने वाले कालोनाइजरों को कोई खौफ नहीं है। इसी का नतीजा है कि इन छह सालों में गुरुग्राम में 34, सोहना में 4, पटोदी में 17 व फारूखनगर में 23, रेवाड़ी में 7, बावल में 3, धारूहेड़ा में 2, नारनौल में 19, महेंद्रगढ़ में 5, कनीना में 1, नांगल चौधरी में 4, फरीदाबाद में 63, पलवल में 40, होडल में 15, हथीन में 6, नूहं में 4, ताउडू में 7, रोहतक में 68, सांपला में 6, महम में 7 व 2 अन्य, बहादुरगढ़ में 8, झज्जर में 7, पानीपत में 46, समालखा में 13, सोनीपत में 23, गोहाना में 4, गनौर, खरखौदा व कुंडली में 12, अंबाला शहर में 38, अंबाला सदर में 31, नारायणगढ़ में 16, बराड़ा में 2, कैथल में 42, गुहला चीहका में 11, पूंडरी व कलायत में 4-4, कुरुक्षेत्र के थानेसर में 65 व शाहबाद, लाडवा और पेहवा में37, यमुनानगर में 44, रादौर में 7, पंचकूला में 32, करनाल में 28, घरोंडा, इंद्री, असंध, निसिंग, नीलोखेड़ी व तरावड़ी में 9, हिसार में 13, हांसी में 7, बरवाला व नारनौंद में 12, फतेहबाद में 6, टोहाना व रतियां में 11-11, भूना में 10, सिरसा में 14, डबवाली में 3, रानियां में 2, भिवानी में 10, चरखीदादरी में 8, नरवाना में 25, सफीदों, उचाना व जुलाना में 18 अवैध कालोनियां काटी गई।
हरियाणा सरकार अवैध कालोनियों के खिलाफ कार्रवाई को पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चार सौ से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। जबकि अवैध कालोनियों को गिराने का काम भी जारी है। हमारी सरकार ने इस तरह के गोरखधंधे को न कभी बढ़ावा दिया है और न ही देगी। इस मामले में लगातार कार्रवाई जारी है।
- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा