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डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की 'जजपा' के भीतर सुलग रही विरोध की चिंगारी, संतुष्ट नहीं विधायक

Thu, 05 Mar 2020 11:05 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
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उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र सत्ता पक्ष को कई सबक सिखा गया। जजपा में सुलग रही विरोध की चिंगारी के कई उदाहरण भी देखने को मिले। भाजपा को जहां विपक्ष से लोहा लेने के लिए अनुभवी व मुखर नेताओं की कमी खली, वहीं गठबंधन सहयोगी जजपा विधायकों के हमले भी सहने पड़े। जजपा विधायकों ने सरकार के अनेक फैसलों का खुलकर विरोध किया। मंत्रियों के साथ सीधी टक्कर लेने से ये विधायक हिचकिचाए नहीं। सरकार में हो रही अपनी अनदेखी से क्षुब्ध कई विधायकों ने अपनी पीड़ा जाहिर करने से कोई संकोच नहीं किया।
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जजपा के आधा दर्जन विधायक सरकार की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट दिखे। पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को हराने वाले नारनौंद से विधायक रामकुमार गौतम ने सरकार को अनेक मुद्दों पर घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। भ्रष्टाचार को लेकर कई तंज कसे। अपनी पार्टी के वादों को लेकर सदन में एक के बाद एक निशाने साधे। जोगी राम सिहाग ने लाल डोरे के सीएम मनोहर लाल के फैसले को ही चुनौती दे डाली और उसे रद करने की मांग की। जिस पर बाद में डिप्टी स्पीकर को लाल डोरे पर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

अमरजीत ढांडा भी कई मुद्दों पर तेवर दिखाने में आगे रहे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को मात देकर विधानसभा पहुंचे देवेंद्र बबली तो नशे के मुद्दे पर सीधा सरकार से टकरा गए। उन्होंने सदन में खुलकर मोर्चा खोला। उनके निशाने पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रहे। बजट सत्र में सुनवाई न होने से बबली की नाराजगी और बढ़ गई है। जजपा विधायक ईश्वर सिंह ने भी कई मौकों पर जनहित के मुद्दों की ठोस पैरवी करते हुए सरकार के लिए स्थिति असहज कर दी। भाजपा विधायक भी जजपा विधायकों के तेवरों को देखकर सकपका गए।
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हम सरकार में अहसास नहीं हो रहा: बबली

जजपा विधायक देवेंद्र बबली का कहना है कि गठबंधन सरकार में सुबूतों के आधार पर भी सुनवाई नहीं हो रही। सरकार के सहयोगी के तौर पर व्यवहार ही नहीं किया जा रहा। जिसकी उन्हें पीड़ा है। हर सरकार में हैं, उसका अहसास ही नहीं हो रहा है। जब गठबंधन सहयोगी पार्टी के विधायकों की ही सुनवाई नहीं होगी तो बाकि विधायकों को कितना सुना जाएगा, यह खुद अंदाजा लगा सकते हैं।

कद्दावर नेताओं को नाखुश नहीं करना चाहती भाजपा
कद्दावर भाजपा नेताओं को हराकर जीते जजपा विधायकों को तवज्जो न मिलने के पीछे अनेक कारण हैं। जजपा के साथ भाजपा ने मिलकर सरकार तो बना ली, लेकिन कैप्टन अभिमन्यु, सुभाष बराला सरीखे नेताओं को हराने वाले विधायकों की जीत को वह अब तक पचा नहीं पा रही।

इसलिए उन्हें अनदेखा किया जा रहा है। बराला प्रदेशाध्यक्ष हैं तो कैप्टन की भाजपा में अच्छी पैठ है, सरकार उन्हें किसी सूरत में नाराज नहीं करना चाहती। इसलिए भी उन्हें अनदेखा किया जा रहा है, चूंकि, जजपा विधायक सीधे सरकार व पूर्व मंत्रियों, विधायकों पर अनेक आरोप लगा रहे हैं।
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