हरियाणा में रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी में एक आईएएस अधिकारी की नियुक्ति पर आईएएस अशोक खेमका ने सवाल खड़ा कर दिया है। खेमका ने कहा है कि वाड्रा डीएलएफ लैंड डील को क्लीन चिट देने वाली कमेटी के सदस्य रहे अधिकारी को सरकार कैसे इस पद पर नियुक्त कर सकती है।
खेमका की प्रतिक्रिया पर उनके ही विभाग के मंत्री अनिल विज भी समर्थन में आ गए हैं। विज ने कहा है कि सर्च कमेटी को ऐसे अधिकारी का नाम ही नहीं भेजना चाहिए था, जो कि विवादास्पद है। खेमका का यह ट्वीट इस समय ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय है, क्योंकि कई धुरंधर हरेरा में नियुक्ति पाने के लिए लंबे समय से लॉबिंग कर रहे थे।
वाड्रा डीएलएफ लैंड डील को पूर्व की हुड्डा सरकार में उजागर करने वाले खेमका वर्तमान सरकार में भी तबादले दर तबादले झेल रहे हैं। हाल ही में सरकार ने उन्हें खेल विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया है।
तबादले से आहत खेमका ने टवीट किया था कि कई सारे कामों की तैयारियां थीं और अचानक एक और तबादले की खबर मिल गई। एक बार फिर से आपातकालीन लैंडिंग हो गई और निहित स्वार्थों की जीत हो गई।
खेमका का ट्वीट
खेमका ने कहा है कि वर्ष 2012 में राबर्ट वाड्रा डीएलएफ लैंड डील को क्लीन चिट देने वाली समिति में शामिल रहे एक अधिकारी को सरकार ने रियल इस्टेट रेगुलेटरी के लाभप्रद पद पर नवाजा है। ऐसे लोगों पर सख्ती की बजाए हम उन्हें ढील दे रहे हैं। इनकी सफलता का कौन सा छिपा हुआ मंत्र है।