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कूबड़ का है इलाज, समय रहते लें डॉक्टर की सलाह

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चंडीगढ़। कूबड़ का इलाज संभव है। इसे छिपाने की जरूरत नहीं है। समय रहते इसकी स्क्रीनिंग हो जाए तो हड्डी काटकर निकालने की नौबत नहीं आती। यह जानकारी स्पाइन सर्जन डॉ. दीपक जोशी ने बुधवार को प्रेस क्लब में दी। उन्होंने बताया कि कूबड़ किसी को भी हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली स्क्रीनिंग से भी इसकी जानकारी हो सकती है, लेकिन उस समय इसका इलाज नहीं किया जा सकता। जन्म के बाद जितनी जल्दी इसकी सर्जरी हो जाए, उतना बेहतर होता है। क्योंकि बचपन में हड्डी में लचीलापन होता है और उसे आसानी से सीधा किया जा सकता है, जबकि वयस्कों में हड्डी कठोर हो जाती है, जिसे काटकर निकालना पड़ता है। ऐसे में अगर कूबड़ का असर व्यापक हो तो उसके कारण हृदय और फेफड़े पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसका इलाज जल्द से जल्द करना चाहिए।
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डॉ. दीपक ने बताया कि भारत में ये समस्या लड़कियों में समय रहते सामने नहीं आती, जबकि विदेशों में इसकी स्क्रीनिंग स्कूल में ही हो जाती है। वहां स्कूलों में ऐसी बीमारियों से बचाव के लिए स्क्रीनिंग की अलग से व्यवस्था है। यहां लड़कियां अगर इस तरह की परेशानी अपनी दादी-नानी से साझा करती हैं तो उनसे कह दिया जाता है कि धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा, जबकि समस्या बढ़ती है।
पुष्पा की जिंदगी में लौटी खुशियां
इस दौरान सिरसा निवासी 21 वर्षीय पुष्पा भी वहां मौजूद थी। पुष्पा ने बताया कि वह भी कूबड़ की शिकार थीं। कूबड़ के कारण उनका मानसिक तनाव काफी बढ़ गया था। शादी की उम्र होने के कारण उनके परिजनों की भी चिंता बढ़ती जा रही थी। इसी बीच इलाज के लिए वे डॉ. दीपक के संपर्क में आई। एडवांस न्यूरो-मॉनीटरिंग टेक्नोलॉजी और न्यूरो-नेविगेशन की मदद से डिफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी की, जो 8 घंटे तक चली। अब पुष्पा पूरी तरह से ठीक हैं।
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