पंजाब और हरियाणा में दो दिन से तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी गेहूं और आलू की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है।
पंजाब में इस बार आलू की बंपर फसल होने की उम्मीद थी। आलू की 20 फीसदी फसल की भी पुटाई नहीं हुई थी कि बारिश ने खेतों को लबालब कर दिया। इससे फसल के काली पड़ने और गलने का खतरा बढ़ गया है। जालंधर में सोमवार सुबह से बारिश की बौछारों के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। तापमान फिर गिरकर 18 डिग्री तक पहुंच गया।
लुधियाना में रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाएं चलती रहीं। 24 घंटे के दौरान शहर में 41.5 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। तापमान 13.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। पटियाला में सोमवार शाम तक 65.9 मिलीमीटर पानी बरस चुका था। निचले इलाकों में पानी जमा हो गया है।
50 हजार हेक्टेयर की फसल खराब
किसान संगठनों का दावा है कि बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि से अब तक गेहूं की फसल को करीब 25 फीसदी और आलू की फसल को 15 से 20 फीसदी तक नुकसान हुआ है। किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी कराई जाए और पीडि़त किसानों को मुआवजा दिया जाए।
उधर, गुरदासपुर में कृषि विभाग की विशेष टीम ने मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. लखविंदर सिंह हुंदल के नेतृत्व में गांव सरावां, दाखला, हरदान, नंगल, आली नंगल, डुगरी, खोखर, दबूडी, उमरपुरा का दौरा करके बारिश से नुकसान का जायजा लिया।
कंफेडरेशन ऑफ पोटेटो सीड फार्मर्स के प्रधान सुखजीत सिंह भट्टी का कहना है कि सूबे में फिलहाल 50 हजार हेक्टेयर जमीन में सीड का आलू तैयार है जिसकी पुटाई का काम चल रहा था।
बारिश से खेतों में पानी जमा होने के कारण आलू की पुटाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। बारिश से 15 से 20 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है।
हरियाणा में जमीन पर बिछ गई करोड़ों की गेहूं
प्रदेश भर में शनिवार शाम से लेकर सोमवार तक 100 एमएम से ज्यादा बरसात हुई है। जिस कारण गेहूं की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि जो फसल इस समय जमीन पर बिछ गई है, उसमें उत्पादन पर काफी असर होगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि ऐसे गेहूं के उत्पादन में 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
जिसका सीधा असर प्रदेश में कुल गेहूं उत्पादन पर होगा। कृषि विभाग के अनुसार हरियाणा में इस बार करीब 24 लाख 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई है। इसमें गेहूं का अनुमानित उत्पादन 46 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 11 करोड़ 27 लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें से यदि 10 प्रतिशत कम होता है तो यह एक करोड़ 12 लाख 70 हजार क्विंटल गेहूं का उत्पादन कम होगा, जिसकी न्यूनतम समर्थन मूल्य के हिसाब से कीमत 1634 करोड़ रुपये से अधिक बनती है। इस तरह से प्रदेश के किसानों को 1634 करोड़ रुपये से ज्यादा का झटका लगा है।
गिरदावरी के आदेश
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान की विशेष गिरदावरी करने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रभावित इलाकों की विशेष गिरदावरी कर जल्द रिपोर्ट दी जाए।