चंडीगढ़। कोरोना के कारण पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए हर विश्वविद्यालय में एक कमेटी बनेगी। नोट्स आदि किस माध्यम से भेजे जा रहे हैं, यह भी चेक होगा। यदि किसी शिक्षक की ओर से भेजी जा रही शिक्षण सामग्री गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरेगी तो उन्हें नोटिस जारी होंगे। कोरोना के आने के बाद यूजीसी ने ऑनलाइन पढ़ाई के निर्देश दिए थे। कोरोना की दूसरी लहर के बाद तमाम शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई ऑफलाइन हो गई थी, लेकिन तीसरी लहर ने फिर से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवा दी।
यूजीसी ने कहा है कि पढ़ाई की गुणवत्ता सभी को बनाए रखनी है। उन्होंने तर्क दिया था कि ऑफलाइन पढ़ाई में विद्यार्थी सामने होते हैं। ऐसे में समझ नहीं आता है तो वह कई बार पूछते हैं, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों को नेटवर्क से लेकर तमाम समस्याएं रहती हैं। ऐसे में शिक्षक अपने पढ़ाने के तौर तरीकों को और बेहतर करें ताकि छात्रों को पढ़ाया गया पाठ समझ आ सके। मेल आदि के जरिए आने वाली शिकायतों के निवारण भी समय से करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि ऑनलाइन पढ़ाई और सामग्री की जांच होती है तो कई कमियां निकलकर आएंगी, लेकिन इसकी जांच निष्पक्षता से होनी चाहिए। पिछले साल कुछ शिक्षकों की शिकायतें मिली थीं कि वह किताब की फोटो खींचकर छात्रों को नोट्स के रूप में भेज रहे हैं। हालांकि बाद में इस प्रक्रिया में सुधार हुआ था।