चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ प्रशासन के गैर जिम्मेदार रवैये पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्ती करते हुए दोनों पर तीन-तीन हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट आवंटन मामले में जवाब देने में हो रही देरी पर यह कॉस्ट लगाई गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों के रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। मामले की आगामी सुनवाई 13 जनवरी के लिए निर्धारित की गई है।
यह है स्कीम
सीएचबी की तरफ से ए कैटेगरी के 252 फ्लैट बनाए जाने हैं। ए कैटेगरी का फ्लैट दो हजार वर्ग फीट (तीन बेडरूम) में बनना है। इसके लिए 312 असफल आवेदक हैं। बी कैटेगरी के 168 फ्लैट 1400 वर्ग फीट (दो बेडरूम) में बनने हैं।
इसके असफल आवेदक 155 हैं। सी कैटेगरी के 3066 फ्लैट बनने हैं और यह फ्लैट 900 वर्ग फीट में बनेंगे। इसके असफल आवेदक 2976 हैं। डी कैटेगरी के 444 फ्लैट बनने हैं और इसके असफल आवेदक 438 हैं।
-14 जनवरी, 2008 को लांच हुई थी योजना
-7811 आवेदन मिले थे
-3930 ड्रा में सफल रहे थे
-3881 ड्रा में असफल रहे थे
-4 नवंबर, 2010 को निकाला गया था ड्रा
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने भी प्रशासन के कर्मचारियों की आवासीय योजना के लिए चार साल पहले प्रशासन के पास 25 फीसदी हिस्सा जमा नहीं कराया था।
प्रशासन ने हालांकि सीएचबी को जमीन अलॉट नहीं की थी, लेकिन सेक्टर-52, 53, 56 में इस आवासीय योजना के लिए फ्लैट बनाने के लिए जमीन की मार्किंग की थी और नियमों के अनुसार सीएचबी को इसके बाद 25 फीसदी हिस्सा जमा कराना था, लेकिन सीएचबी ने ऐसा नहीं किया।
अब याची पक्ष ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्कीम को लेकर गहराए विवाद के हल के लिए याचिका दाखिल की है। याचिका में प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है।
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।