गुरमीत राम रहीम पर फैसले से पहले पंचकूला में जुटी भीड़, फैसला आने और उसकेबाद की मैनेजमेंट के लिए फंडिंग हनीप्रीत के माध्यम से हुई थी। हनीप्रीत ने डेरा की मैनेजमेंट में बड़े ओहदेदार डॉ. पीआर नैन को पैसे दिए थे। हर जिले के लिए एक करोड़ और अंबाला के लिए पांच करोड़ रुपये जारी किए गए थे।
पुलिस जांच में यह पता चला है कि डॉ. नैन ने हनीप्रीत से पैसा मिलने केबाद सभी जिला प्रभारियों को रकम पहुंचाई। पंचकूला के इंचार्ज चमकौर सिंह और डॉ. नैन की डिसक्लोजर में भी इस बात का जिक्र किया गया था। अब पुलिस हनीप्रीत से यह उगलवाने में लगी है कि मेनेजमेंट केलिए जो पैसा दिया था, वह किस तरह से इस्तेमाल किया जाना था?
पैसे की खर्च की मैनेजमेंट में भीड़ जुटाना, गाड़ियों का काफिला तैयार करना और किस तरह के खर्च इस पैसे से किए जाने थे। डॉ. नैन और चमकोर सिंह की डिस्कलोजर केबाद हनीप्रीत से भी इस बारे में पूछताछ हुई और उसका रिमांड लेने में भी इसे आधार बनाया गया।
खर्च का ब्योरा, केस की मजबूती
पुलिस इस खर्च के ब्यौरे को जुटाकर एक मजबूत केस तैयार करना चाहती है। क्योंकि हर जिले केलिए एक करोड़ और सबसे ज्यादा पांच करोड़ रुपये अंबाला के लिए देने का मतलब है कि 25 से 30 करोड़ मैनेजमेंट केलिए जारी हुआ। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि अंबाला के लिए ज्यादा पैसा इसलिए खर्च हुआ कि वहां डेरे केसमर्थक भी ज्यादा हैं और उस क्षेत्र में डेरे की प्रॉपर्टी भी ज्यादा है।