हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मनोज यादव के साथ एक और विवाद जुड़ गया है। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के गठन को लेकर नकारात्मक रवैया अपनाने के आरोप डीजीपी पर लगे हैं। एडीजीपी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने यह आरोप गृह सचिव राजीव अरोड़ा को लिखे पत्र में लगाए हैं। नारकोटिक्स ब्यूरो प्रमुख जाधव के पत्र पर गृहमंत्री ने बुधवार को संज्ञान भी ले लिया।
गृहमंत्री ने डीजीपी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। उन्हें सात दिन में लिखित जवाब देना होगा। बाकायदा इसके आदेश भी जारी हो गए हैं। एडीजीपी श्रीकांत जाधव ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के गठन के नौ महीने बाद भी कार्यालय नहीं है।
कार्यालय की स्थापना को लेकर डीजीपी नकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं। उनके साथ दर्जनों बार पत्राचार भी हुआ। व्हाट्सएप पर संदेश भी भेजे गए हैं, मगर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में नशा तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कैसे की जा सकती है।
कार्यकाल विस्तार को लेकर विज के निशाने पर चल रहे डीजीपी इस पत्र के बाद और घिर गए हैं। चूंकि, नशा तस्करी पर लगाम कसने के लिए उत्तर भारत के राज्यों के मुख्यमंत्रियों का समूह बना हुआ है। अंतरराज्यीय सचिवालय के गठन के साथ ही प्रदेश स्तर पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना की गई है। लेकिन अफसरों के आपसी विवाद व डीजीपी का गृह मंत्री के साथ तालमेल सही न होने से यह ब्यूरो अभी तक कार्यालय को ही तरस रहा है।