बुक फेयर पुस्तक प्रेमियों के लिए नई सौगात लाया। इस बार फेयर में हिंदी की किताबों की डिमांड पहले से कई गुणा ज्यादा रही। प्रकाशनों की उम्मीद से ज्यादा हिंदी पुस्तकें मेले में बिकी हैं। हिंदी के अधिकतर प्रकाशनों को दोबारा से किताबें मंगवानी पड़ीं।
राजकमल प्रकाशन के सेल्समैन मनीष कुमार ने बताया कि वे पहले भी चंडीगढ़ आए थे। उस समय हिंदी की किताबों के प्रति इतना अधिक रिस्पांस नहीं मिला था।
इसलिए वे हिंदी की कम किताबें लेकर आए थे। इस बार हिंदी किताबों की बिक्री ने उन्हें किताबें दोबारा मंगवाने पर मजबूर कर दिया। यह हिंदी प्रकाशनों के लिए अच्छी खबर है।
राजकमल के स्टाल में राग दरबारी, महिला आंचल, डॉ. भीम राव अंबेडकर की ऑटोबायोग्राफी, सिनेमा और कुलदीप नैय्यर की किताबों की खूब बिक्री हुई।
नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल पर भी पुस्तक प्रेमियों की काफी भीड़ रही। कहानियों और ऑटोबायोग्राफी की किताबें भी लोग खूब खरीद रहे थे। पुस्तक महल के स्टाल पर भी लोगों का खूब आना-जाना था।
पंचकूला के आधार प्रकाशन की किताबें भी लोगों को खूब भाईं। आधार प्रकाशन के देश निर्मोही ने बताया कि जो उन्हें पटना के बुक फेयर में रिस्पांस मिलता था। अब चंडीगढ़ में भी ऐसा ही क्रेज है।
हरबंश दुआ की क्रिएटिविटी की तीन दिन में 100 किताबें बिक चुकी हैं। सामयिक पब्लिकेशन के स्टॉल पर भी लोगों की अच्छी भीड़ उमड़ी।
चंडीगढ़ के सेक्टर-43 से बुक फेयर में पहुंची रंजीता वधवा ने बताया कि बुक फेयर में हिंदी की काफी अच्छी किताबें हैं। कई ऐसी किताबे हैं, जो आज के युग में काफी महत्वपूर्ण हैं।
वे अपने बच्चों के लिए हिंदी की किताबें लेने आईं थीं। उन्होंने बताया कि मेले के अलावा ऐसी किताबें खरीदने के लिए दिल्ली ही जाना पड़ेगा।