निकाह की आड़ में क्या धर्म परिवर्तन का कोई रैकेट चल रहा है, इस मामले की सीबीआई जांच का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। अब सीबीआई ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर पहले के आदेश पर स्पष्टीकरण और संशोधन की मांग की है।
हाईकोर्ट ने सीबीआई की अर्जी को स्वीकार करते हुए जांच का आदेश दिया है। साथ ही चंडीगढ़ के डीजीपी को मैनपावर व अन्य संसाधन सीबीआई को उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है।
फतेहगढ़ साहिब के एक प्रेमी जोड़े ने हाईकोर्ट में सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने तस्वीरों में पाया था कि निकाह एक ऑटो-रिक्शा में हुआ था, जबकि याचिका में कहा गया था कि मस्जिद में निकाह किया गया है। जस्टिस मौदगिल ने कहा था कि निकाह की आड़ में कोर्ट को मूर्ख बनाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने फतेहगढ़ साहिब के एसएसपी को जांच का आदेश दिया था। एसएसपी ने रिपोर्ट सौंपी थी कि लड़की ने धर्म नहीं बदला है और न ही निकाह में कुछ अवैध है।
हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे मन में अभी भी शंका है और इसे दूर करना जरूरी है। ऐसा सिर्फ किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की जांच से संभव है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने अब अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि गहन जांच करने के लिए उन्हें एक विशिष्ट निर्देशन की आवश्यकता होगी। हाईकोर्ट ने सीबीआई की मांग को स्वीकार करते हुए इस मामले में पंजाब सरकार, याची व चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी को नोटिस जारी कर दिया था। हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ के डीजीपी को यह भी आदेश दिया कि वह सीबीआई को आवश्यक जनशक्ति उपलब्ध करवाएं।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि इस मामले में पुलिस स्टेशन बदाली अला सिंह बस्सी पठाना में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। चंडीगढ़ पुलिस ने भी इस मामले में जीरो एफआइआर दर्ज की है। जिस मौलवी ने यह निकाह करवाया था, उसे गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन तथ्यों की जांच नहीं हो पाई। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 24 अक्टूबर तक स्थगित करते हुए सीबीआई को विशेष रूप से धर्म के अवैध परिवर्तन की आशंका पर केंद्रित होकर जांच का आदेश दिया है।