डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या मामले में मृतक के बेटे की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा 26 अगस्त को सुनाए जाने वाले अंतिम फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही सीबीआई अदालत के पीठासीन अधिकारी, सरकारी वकील व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याची जगसीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि जब 2002 में उसके पिता की हत्या हुई थी तब वह 8 साल का था। इस मामले में आरोपी राम रहीम है जिसके चलते केस लंबे समय तक चलता रहा। याची ने कहा कि इस मामले में जबसे नए सीबीआई जज आएं है तबसे लगातार सुनवाई को टाला जा रहा है। कई बार सरकारी वकील भी सुनवाई को टालने की मांग कर देते हैं।
याची ने बताया कि पंचकूला सीबीआई अदालत में जो जज हैं, वह चंडीगढ़ से तबादला होने के बाद आएं हैं और हैरत की बात यह है कि चंडीगढ़ में सीबीआई की पैरवी करने वाले सरकारी वकील को भी पंचकूला भेज दिया गया। याची ने कहा कि उसे लगता है कि इस मामले में एकतरफा फैसला सुनाया जा सकता है। साथ ही यह भी बताया गया कि सीबीआई जज के खिलाफ एक अन्य मामले में भी आरोपियों के संपर्क में रहने की शिकायत मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई थी जो फिलहाल विचाराधीन है। ऐसे में इस केस को पंचकूला की सीबीआई अदालत से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की किसी अन्य सीबीआई अदालत में भेजने की याची ने मांग की है।
सीबीआई की ओर से बताया गया कि उनके वकील केपी सिंह को सीबीआई ने ही पंचकूला कोर्ट में नियुक्त किया है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर उनकी नियुक्ति के आदेश और हलफनामा सौंपने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करने के साथ ही 26 अगस्त को इस मामले में सीबीआई कोर्ट को जो फैसला सुनाना था उस पर भी रोक लगा दी है।