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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : अगर पति का जीवन नर्क बनाने के लिए पत्नी पीड़ा में रहने को तैयार है तो पति तलाक का हकदार

Mon, 21 Feb 2022 03:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा विवेक शर्मा, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने तलाक न देने के पठानकोट की फैमिली कोर्ट के आदेश को किया खारिज। कहा, वैवाहिक संबंध न बनाना, झूठी एफआईआर दर्ज करवाना पति के प्रति क्रूरता।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पति का जीवन नर्क बनाने के लिए पत्नी पीड़ा में रहने को तैयार है तो पति तलाक का हकदार है। हाईकोर्ट ने यह आदेश गुरदासपुर निवासी पति द्वारा तलाक की मांग से जुड़ी याचिका मंजूर करते हुए दिया है।

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याचिका में पति ने बताया कि उसका विवाह 2015 में हुआ था। विवाह के 15 दिन बाद ही उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। इसके तीन माह बाद पत्नी ने जम्मू-कश्मीर में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का केस याची व उसके परिवार वालों पर डाल दिया। इतना ही नहीं बल्कि जिन 15 दिन वह घर पर रुकी उसने याची से संबंध भी नहीं बनाए। पहली रात में उसने याची से कहा कि वह उससे नहीं किसी और से विवाह करना चाहती थी। याची ने तलाक के लिए पठानकोट की फैमिली कोर्ट में केस दाखिल किया जिसे खारिज कर दिया गया। जिसके चलते अब याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। 

पत्नी ने याचिका के जवाब में कहा कि पति के परिवार ने 20 लाख और जेवर दहेज के रूप में लाने को दबाव बनाया था। इन चीजों के आने तक पति ने रिश्ता भी नहीं बनाया। हाईकोर्ट ने पत्नी की सारी दलीलें खारिज करते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट के सामने उसने माना था कि शादी बिना दहेज के हुई है। ऐसे में पत्नी की दलील सही नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि घटनाओं के क्रम और तथ्यों के विवरण से यह स्पष्ट है कि एफआईआर की आड़ में पत्नी मानसिक क्रूरता का प्रयास कर रही है जो पति को तलाक का अधिकार देता है। 

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