प्री-प्राईमरी शिक्षकों के 8393 पदों की भर्ती को हाईकोर्ट ने खामी भरा करार देते हुए रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नए सिरे से विज्ञापन जारी करने का आदेश देते हुए कहा कि तीन वर्ष के अनुभव की जो शर्त लगाई गई है वह केवल 50 प्रतिशत पदों के लिए ही लगाई जा सकती है। बाकी के पदों को मुक्त रूप से भरा जाए।
याचिका दाखिल करते हुए नजर सिंह व अन्य ने नियुक्ति प्रक्रिया में तय की गई शर्तों को गलत बताते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 21 सितंबर को हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और साथ ही सरकार से पूछा था कि वह बताए की क्यों न इस पदों कि इस नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए। इस पर सरकार द्वारा दिए जवाब पर हाईकोर्ट ने कहा जवाब स्पष्ट नहीं है और दोनों नोटिफिकेशन पर सरकार कोई जवाब नहीं दे पाई है। लिहाजा हाईकोर्ट ने अब 28 नवंबर की परीक्षा पर रोक लगाते हुए शिक्षा सचिव को इस पर जवाब दिए जाने के आदेश दिया था। अब हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन को ही खारिज करते हुए नए सिरे से विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया है।
दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि पंजाब सरकार ने 23 नवंबर 2020 को प्री-प्राईमरी शिक्षकों के 8393 पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। याचिकाकर्ताओं ने भी ऑनलाइन आवेदन कर दिया था और उन्हें रजिस्ट्रेशन नंबर भी मिल गया था। इसी दौरान बड़ी संख्या में एजुकेशन प्रोवाइडर, एजुकेशन वालंटियर, एजुकेशन गारंटी स्कीम वालंटियर, अल्टरनेटिव और इनोवेटिव एजुकेशन वालंटियर, स्पेशल ट्रेनिंग रिसोर्स वालंटियर, इंक्लूसिव एजुकेशनल वालंटियर जो पहले ही सर्व शिक्षा अभियान के तहत बैक डोर से नियुक्त हुए थे, उन्होंने राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। इनके दबाव में सरकार ने इस विज्ञापन को वापस ले लिया।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि इसके बाद सरकार ने 14 सितंबर को फिर इन्ही पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया और नई शर्ते लगा यह तय कर दिया कि इन पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदक को एजुकेशन प्रोवाइडर, एजुकेशन वालंटियर, एजुकेशन गारंटी स्कीम वालंटियर, अल्टरनेटिव और इनोवेटिव एजुकेशन वालंटियर, स्पेशल ट्रेनिंग रिसोर्स वालंटियर, इंक्लूसिव एजुकेशनल वालंटियर के तौर पर कम से कम तीन वर्षों का अनुभव अनिवार्य होगा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने अब यह शर्तें पहले से कार्यरत शिक्षकों को एड्जस्ट करने के लिए ही की है। इस तरह तो कोई भी आवेदक जिन्हे इसका अनुभव नहीं है, उनकी नियुक्ति ही नहीं होगी और यह पूरी तरह से गलत है, लिहाजा इसे रद्द किया जाए।