कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को सर्व कर्मचारी संघ व हरियाणा सरकार के बीच वार्ता बेनतीजा रही। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर की अध्यक्षता में बैठक में संघ ने नीतिगत मांगों को रखा, लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। संघ ने वार्ता सिरे न चढ़ने के बाद हड़ताल की चेतावनी दी है।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखा गया। अब फैसला सरकार की ओर से लिया जाना है। राज्य कार्यकारिणी की बैठक आयोजित कर आंदोलन तेज करने और हड़ताल पर जाने को लेकर अगली रणनीति बनेगी। बैठक में अधिकारी कच्चे कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण नीति बनाने की बजाय कौशल रोजगार निगम की बात करते रहे। इस पर संघ ने अपना कड़ा विरोध दर्ज करवाया।
इन मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन
एनपीएस को खत्म करने के बजाय सरकार के शेयर को 10 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने विचार करने की बात कही है। लिपिक का वेतन कम है यह तो माना, लेकिन वेतन बढ़ोत्तरी का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। वित्त विभाग के अधिकारियों ने जनवरी 2020 से जून 2021 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों को रिटायरमेंट, ग्रेच्युटी व लीव इनकैशमेंट में डीए का लाभ देने व जुलाई 2021 से महंगाई भत्ते की किस्त जल्द जारी करने की बात कही है। डीए बढ़ोत्तरी के साथ हाउस रेंट में बढ़ोत्तरी व बोनस पर चुप्पी साध ली।
इन मांगों पर सरकार मौन
नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों व शिक्षकों की बहाली, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, पक्का होने तक समान काम-समान वेतन व सेवा सुरक्षा देना, एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन बहाली, लिपिक को 35400 रुपये वेतन व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर पेंशन बढ़ोत्तरी, वर्कलोड अनुसार नए पद स्वीकृत कर नई नियमित भर्ती करना।
बैठक में ये रहे मौजूद
प्रशासनिक विभाग के आयुक्त विजयेंद्र कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग से आईएएस पंकज अग्रवाल, संघ की तरफ से उप प्रधान शीलक राम, कैशियर राजेंद्र बाटू, प्रेस साचिव इंद्र सिंह बधाना, आल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्करज यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी व आल हरियाणा यूनिवर्सटी इम्प्लाइज फेडरेशन के चेयरमैन दया राम सोनी शामिल रहे।