पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा में कैदियों की प्रिमैच्योर रिलीज पॉलिसी पर दोनों राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने पेरोल जंपर की पुनः गिरफ्तारी पर विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों से सवाल किया कि इंटेलिजेंस क्या काम कर रही है? हाईकोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 25 जनवरी के लिए निर्धारित की है।
अधिवक्ता एचसी अरोड़ा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर प्रिमैच्योर रिलीज पॉलिसी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि इस पॉलिसी को रद करने के निर्देश जारी किए जाएं।
याचिका में राज्यपाल द्वारा बिना किसी पैरामीटर के उम्रकैद पाने वाले कैदियों को रूटीन ग्राउंड के तहत रिलीज करने को भी चुनौती दी है।
याचिका में बठिंडा सेंट्रल जेल के 13 अरजियों को हवाला दिया, जिनके तहत उन्हें जेल से रूटीन ग्राउंड पर छोड़ दिया गया। इन सभी कैदियों ने अपने परिवार की दिक्कतों का हवाला अरजियों में रखा और मौजूदा स्थितियों के खंगालने के बजाए इनके रिहाई के आदेश जारी कर दिए गए।
मामले की सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने पेरोल जंपर का मामला भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में सैकड़ों ऐसे कैदी हैं, जिन्हें पेरोल पर छोड़ा गया, लेकिन वे दोबारा कभी जेल नहीं आए।
पुलिस ने भी उन्हें गिरफ्तार करने पर कोई पुख्ता कदम उठाए। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों पुलिस महकमे को कड़ी फटकार लगाते हुए इंटेलिजेंस विंग के कामकाज को लेकर दोनों सरकारों के वकीलों से सवाल कर दिया।