पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खुले मैनहोल के कारण हुई 13 माह के बच्चे की मौत के मामले में हरियाणा सरकार को मृतक के परिजनों को 15 लाख रुपये अंतरिम मुआवजे के तौर पर जारी करने का आदेश दिया है। यह राशि बच्चे के माता-पिता को बराबर अनुपात में सौंपनी होगी। साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को मैनहोल के कारण हुए हादसों के मुआवजे के लिए नीति सौंपने का आदेश दिया है।
जस्टिस दया चौधरी को लिखे गए पत्र में गंगापुत्र राजेश हिंदुस्तानी ने कहा था कि मेन होल्स पर ढक्कन लगे हों यह सुनिश्चित करना एमसी की जिम्मेदारी होती है। हिसार मे जगह-जगह पर खुले मेन होल्स मौजूद हैं जो हादसों का कारण बन रहे हैं। ऐसा ही एक हादसा मजदूर टोनी के साथ हुआ। उसकी पत्नी रेलवे क्वार्टरों के पास काम कर रही थी और इस दौरान उसका 13 माह का बेटा भी साथ था। अचानक बेटे को आस-पास न पाकर मां ने तलाश आरंभ की तो पता चला कि उसकी मेन होल में गिरकर मौत हो गई है।
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घर का चिराग बुझ जाने से पूरा परिवार सदमे में था कि अचानक अधिकारियों ने अपने जिम्मेदारी से बचने के लिए परिवार पर ही दबाव बनाना आरंभ कर दिया। पीड़ित परिवार को उनके घर से निकालने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाया जाए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित हो कि दोषी अधिकारियों को सजा मिले और भविष्य में इस तरह के खुले मेन होल्स के कारण कोई अपनी जान न गंवाए। हाईकोर्ट की जस्टिस दया चौधरी ने पत्र का संज्ञान लेते हुए इसे चीफ जस्टिस को रेफर कर दिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस ने इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनने का निर्णय लिया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ऐसे हादसों के लिए मुआवजा नीति को लेकर जवाब मांगा तो हरियाणा सरकार ने कुछ समय देने की मांग की। हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल अंतरिम मुआवजे के तौर पर मृतक के परिजनों को 15 लाख रुपये दिए जाएं और बाद में कुल मुआवजा तय किया जाएगा। साथ ही अगली सुनवाई पर मुआवजे से जुड़ी नीति हाईकोर्ट में सौंपी जाए।