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Highcourt: वनिता आश्रम मौत मामले में एफआईआर क्यों नहीं, क्या सो रही थी सरकार? हादसे की कहानी पर सवाल

Wed, 29 Apr 2026 08:10 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नवंबर 2025 में हुई नाबालिग की मौत को हादसा बताकर दबाने की कोशिश की गई, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 21 चोटों का जिक्र सामने आया है। इसके बाद एक अन्य मौत का मामला भी सामने आया।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जालंधर के गांधी वनिता आश्रम में नाबालिग लड़की की संदिग्ध मौत और इसके बाद एक अन्य मौत के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे सरकार अभी तक सो रही है।
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अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पंजाब सरकार और पुलिस कमिश्नर को हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव से भी जवाब मांगा है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नवंबर 2025 में हुई नाबालिग की मौत को हादसा बताकर दबाने की कोशिश की गई, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 21 चोटों का जिक्र सामने आया है। इसके बाद एक अन्य मौत का मामला भी सामने आया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए पूछा कि इतने गंभीर मामले में अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या संस्था प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अदालत ने यह भी पूछा कि घटनास्थल से साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और अन्य जरूरी सामग्री जुटाने में देरी क्यों हुई।

याचिकाकर्ता राजीव कावरा ने जनहित याचिका में बताया कि फिरोजपुर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने 19 नवंबर 2020 को नाबालिग बलजिंदर कौर को संरक्षण में रखने का आदेश दिया था। बाद में उसे जालंधर के गांधी वनिता आश्रम में रखा गया, जहां 21 नवंबर 2025 की रात उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

अगले दिन दर्ज डीडीआर में मौत का कारण बाथरूम में फिसलकर गिरना बताया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों के निशान मिलने से मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
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