फिरोजपुर के कई गांवों के निवासियों को मनरेगा के तहत आवेदन करने के बाद भी न रोजगार और न ही बेरोजगारी भत्ता जारी करने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार तथा पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब कर लिया है। याचिका दाखिल करते हुए फिरोजपुर निवासी बग्गा सिंह ने बताया कि मनरेगा स्कीम के तहत लोगों को रोजगार देने की व्यवस्था की गई थी।
इस एक्ट के प्रावधान के अनुसार जो भी व्यक्ति काम के लिए आवेदन करता है उसे आवेदन के 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध करवाना होता है। रोजगार न होने की स्थिति में प्रतिदिन के आधार पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। याची ने कहा कि वह लंबे समय से मजदूरों के हितों के लिए काम कर रहा है और अनुसूचित जाति से है।
मनरेगा के तहत आवेदन करने वाले भी अधिकतर लोग अनुसूचित जाति के गरीब हैं। इन सभी ने मनरेगा के तहत काम के लिए आवेदन किया था। आवेदन करने के बाद भी न तो इन्हें काम दिया गया और न ही बेरोजगारी भत्ता ही जारी किया गया। याची ने कहा किय यह सब अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुआ है और हो सकता है कि इसमें कोई बहुत बड़ा घोटाला हो।
ऐसे में इस मामले की गहन जांच की जरूरत है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मनरेगा के तहत वितरित करने के लिए आई राशि का क्या किया गया और क्यों यह जरूरतमंदों तक नहीं पहुंची। यह भी जांच का विषय है कि आखिर यह पैसा किसकी जेब में गया। याची ने यह भी अपील की कि मनरेगा के तहत आवेदन करने वालों को बेरोजगारी भत्ता जारी किया जाए।