Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हुडा के प्लाटों की मल्टीपल अलॉटमेंट मामले में हरियाणा सरकार और हुडा घिर गई है। बुधवार को हाईकोर्ट ने साल 1987 की दो पॉलिसी को लेकर याची की ओर से उठाए गए सवालों पर स्पष्ट किया है कि याची ने इन पॉलिसी के वैध होने पर ही सवाल उठाया हैं। ऐसे में या तो सरकार और हुडा साबित करें कि यह पॉलिसी सही नियमों के अनुसार तैयार हुई हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो अलॉटमेंट से जुड़ी सभी एफआईआर रद कर दी जाएंगी।
सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने हुडा की 1987 में बनाई गई दो पॉलिसी को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा किया। याची ने कहा कि नौ जनवरी और पांच मई 1987 की पॉलिसी आरक्षण को लेकर मुख्य हैं, जिनमें अलॉटमेंट से जुड़ी शर्त थी। पॉलिसी को बनाने का अधिकार हुडा के प्रशासक के पास नहीं है। बावजूद इसके मुख्य प्रशासक ने खुद ही इन पॉलिसी को बनवाया और मंजूरी दे दी। इस लिहाज से यह पॉलिसी ही सही नहीं है।
कहा गया कि रिव्यू करने के बाद संशोधित पॉलिसी लागू की गई है। जबकि हुडा के पास रिव्यू करने का अधिकार ही नहीं है। यह काम विधायिका का है। लैंड डिस्पोजल एक्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि एक्ट में किसी भी तरह से किसी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान ही नहीं है। इसके तहत जमीन वापस ली जा सकती है और पैसा देने से इनकार किया जा सकता है, लेकिन मामले में एफआईआर दर्ज करवाई जा रही हैं। इस तरह पॉलिसी खारिज करने की अपील की गई। हाईकोर्ट ने हुडा से मामले पर जवाब तलब किया है।