विदेश में पढ़ाई के लिए वीजा दिलाने का वादा कर लाखों रुपये ठगने के आरोपियों को जमानत का हकदार न मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोप के अनुसार वीजा का आवेदन तक नहीं किया गया और झूठा दस्तावेज दिखा बताया गया कि उनका आवेदन रद्द हो गया है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली की कंसल्टेंसी सर्विस के कथित मालिक अमृतपाल व कथित कर्मी नेहा गौतम तथा सुमित ने अग्रिम जमानत की मांग की थी। शिकायतकर्ता प्रेम कुमार ने मोहाली पुलिस को शिकायत दी थी कि उन्होंने कंसल्टेंसी से बच्चों के स्टडी वीजा के लिए आवेदन किया था। पहले उनसे किश्तों में हजारों रुपये लिए गए और बाद में कह दिया गया कि उनका आवेदन रद्द हो गया है, क्योंकि कनाडा में नियम बदल गए हैं।
पहले कनाडा पहुंच कर कॉलेज में फीस जमा होती थी लेकिन अब पहले ही कनेडियन अथॉरिटी को पैसा जमा करवाना पड़ता है। शिकायतकर्ता ने साढ़े सात लाख रुपया याचिकाकर्ताओं को दिया लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक एंबेसी से कोई जानकारी नहीं मिली। इसके चलते शिकायतकर्ता कंसल्टेंसी ऑफिस के दफ्तर पहुंचे तो वह बंद मिला।
कथित मालिक अमृतपाल ने कहा कि वह अपना पूरा ऑफिस नेहा गौतम व सुमित को सौंप चुके थे। यदि ऐसा हुआ है तो उसके लिए नेहा व सुमित जिम्मेदार हैं। नेहा व सुमित ने कहा कि वह तो केवल कर्मचारी हैं, यदि कोई धोखाधड़ी हुई है तो उसके लिए मालिक अमृतपाल जिम्मेदार हैं। हाईकोर्ट ने तीनों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में बैंक खाते में पैसा जमा हुआ है और फर्जी रसीद दी गई हैं। ऐसे में सभी आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।